सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘निरंतर इंतजार में बैठे युवराज’ करार दिया और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पर चुनावी हार को स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि कांग्रेस ने मौजूदा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले 2014 से 2025 के बीच 56 चुनावों में हार का सामना किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने नेतृत्व की नाकामियों पर आत्ममंथन करने के बजाय अपनी चुनावी हार के लिए निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहरा रही है। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, “कांग्रेस 2014 से चुनाव हार रही है। उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त भी नहीं थे। मौजूदा एसआईआर से पहले 2014 से 2025 के बीच कांग्रेस 56 विधानसभा चुनाव हार चुकी है।”
कांग्रेस हार पर आत्ममंथन करने के बजाय आयोग पर हमला कर रही है
स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जनता के चुनावी जनादेश को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और इसके बजाय चुनावों की वैधता व संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।उन्होंने कहा, “निरंतर इंतजार में रहने वाला युवराज अपनी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं है। कांग्रेस बार-बार चुनाव क्यों हार रही है, इस पर आत्ममंथन करने के बजाय वह निर्वाचन आयोग पर हमला कर रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।”ईरानी ने कांग्रेस की आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर मतदाता सूचियों में दोहरे नाम या मृत व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं, तो कांग्रेस मृत लोगों के नाम फिर से शामिल कराने की मांग क्यों कर रही है? वह दोहरी प्रविष्टियों को बरकरार क्यों रखना चाहती है?”
तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा
ईरानी ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने चुनावी लाभ के लिए पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को जगह दी। उन्होंने आरोप लगाया, “तृणमूल कांग्रेस मतदाता सूची में दोहरे और फर्जी मतदाताओं के नाम क्यों चाहती है? पार्टी ने अपने फायदे के लिए घुसपैठियों को जगह दी।” ईरानी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो रहा है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर ‘‘वोट चोरी’’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। ईरानी ने कहा कि एसआईआर एक व्यवस्थित और पारदर्शी प्रक्रिया है। उन्होंने दावा किया कि निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) कई बार मतदाताओं के घर गये। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों के करीब 20 लाख बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) भी इस प्रक्रिया से जुड़े थे। उन्होंने सवाल किया कि अब ये दल इसकी पारदर्शिता पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। भाजपा नेता ने दावा किया कि मसौदा मतदाता सूचियों से हटाए गए करीब 13 करोड़ नामों में से लगभग तीन करोड़ मृत मतदाताओं के थे, एक करोड़ नाम दोहरे थे, करीब तीन करोड़ मतदाता बार-बार दौरे के बावजूद अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले और लगभग छह करोड़ मतदाताओं ने अपना पता बदल लिया था।उन्होंने कहा कि करीब 90 करोड़ मतदाताओं में से 90 प्रतिशत का सत्यापन पूरा कर लिया गया है।
1952 से देश में 12 एसआईआर कराए गए
ईरानी ने कहा कि 1952 से देश में 12 एसआईआर कराए गए और इनमें से 10 कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में हुए थे। उन्होंने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं की राजनीतिक गतिविधियों के दौरान 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।भाजपा नेता ने कहा, “उन लोगों की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है, जो लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार बदलने की मांग करने के बजाय अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लोग चुनाव के जरिए अपनी राय व्यक्त करते हैं और सरकार बदलते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, कोई ‘शासन व्यवस्था’ नहीं।’’