कोलकाता : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में व्यापक जांच की मांग की। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, विधान भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता चरण सिंह सप्रा ने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय लेन-देन का नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है। इसलिए इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच कराई जानी चाहिए।
सप्रा ने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े दान, भूमि खरीद, निर्माण अनुबंध और मंदिर में प्राप्त चढ़ावे में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में इस संबंध में कई शिकायतें सामने आईं, लेकिन उन पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
कांग्रेस ने मौजूदा एसआईटी जांच को अपर्याप्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने, ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने तथा मामले में नामजद सभी आरोपितों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानून के समक्ष सभी समान हैं और किसी भी दोषी को राजनीतिक या संस्थागत संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
वही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने बारुईपुर मामले में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात क्यों नहीं की गई। उन्होंने पुलिस मुठभेड़ में मुख्य आरोपी की मौत पर कहा कि मुठभेड़ों की नीति न्यायिक व्यवस्था और कानून के शासन को कमजोर करती है तथा इससे लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होता है।
उन्होंने हाल ही में भाजपा में शामिल हुए तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों पर अवसरवादी राजनीति का आरोप लगाया। शुभंकर सरकार ने कहा कि यदि वास्तव में उनके वैचारिक मतभेद थे, तो उन्हें सत्ता और पद पर रहते हुए ही इस्तीफा देना चाहिए था, न कि राजनीतिक लाभ की संभावना देखकर दल बदलना चाहिए था।