अंजलि भाटिया
नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ेमेनेई की हत्या को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर तीखा सवाल उठाया है। पार्टी ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई पर भारत की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आना चिंताजनक है और इससे देश की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी मुख्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री की चुप्पी को बआपराधिक मौन बताते हुए कहा कि यह केवल मानवीय मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति और पश्चिम एशिया के साथ उसके संबंधों से जुड़ा गंभीर सवाल है।
खेड़ा ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान पर हमला उस समय किया गया जब शांति वार्ता चल रही थी। उनके मुताबिक यह एक “अवैध युद्ध” है, लेकिन भारत सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट निंदा सामने नहीं आई। उन्होंने संस्कृत कहावत “मौनं स्वीकृति लक्षणम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार मौन भी सहमति का संकेत माना जाता है और प्रधानमंत्री की चुप्पी से यही संदेश जा रहा है।
पवन ने प्रधानमंत्री की हालिया इजरायल यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि युद्ध शुरू होने से ठीक पहले यह दौरा हुआ और प्रधानमंत्री के लौटने के 48 घंटे के भीतर अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी, जिसमें खामेनेई की हत्या की खबर सामने आई।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि घटनाक्रम की यह श्रृंखला कई तरह की आशंकाओं को जन्म देती है। उन्होंने विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री “गैंग्स ऑफ एपस्टीन” के प्रभाव में काम कर रहे हैं और इस पूरे घटनाक्रम में एक “कठपुतली” की तरह दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। खेड़ा के अनुसार, ऐसे समय में प्रधानमंत्री को नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।
आर्थिक असर की चेतावनी
कांग्रेस ने यह भी चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में युद्ध का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। खेड़ा ने कहा कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मिज में आवाजाही बाधित होती है तो कच्चे तेल, सीएनजी और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे ऊर्जा और खाद्य महंगाई की नई लहर आ सकती है। उन्होंने बताया कि लगभग 10,000 करोड़ रुपये की भारतीय समुद्री संपत्ति इस संकट से प्रभावित हो सकती है। कांग्रेस के अनुसार 38 भारतीय जहाज और करीब 1,100 नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और जहाज मालिकों के संगठन ने सरकार से मदद की अपील की है।
खेड़ा ने भारतीय महासागर में एक ईरानी जहाज को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा निशाना बनाए जाने की घटना पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार यह जहाज हाल ही में भारत के नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था और उस समय भारत का मेहमान था।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को उस दावे का स्पष्ट खंडन करना चाहिए जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेनाएं भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रही हैं। खेड़ा के मुताबिक इस मामले में केवल प्रेस सूचना ब्यूरो की ओर से प्रतिक्रिया आई है, जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया गया।
कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा घटनाक्रम ने भारत की विदेश नीति और पश्चिम एशिया में उसकी कूटनीतिक भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।