ग्रेट निकोबार विकास परियोजना पर उठे सवाल
सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : ग्रेट निकोबार स्थित इंदिरा प्वाइंट के दौरे को लेकर व्यक्तियों पर दर्ज की जा रही एफआईआर की खबरों से चिंता का माहौल पैदा हो गया है। क्षेत्र में लगाए गए प्रतिबंधों और उनके स्थानीय आजीविका तथा पर्यटन गतिविधियों पर प्रभाव को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। श्री विजयपुरम में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष जॉन रॉबर्ट ने कहा कि इंदिरा प्वाइंट के दौरे को लेकर नियमों के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने की खबरें “भ्रमित करने वाली और चिंताजनक” हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रतिनिधियों और आगंतुकों के खिलाफ भी कार्रवाई की सूचना मिल रही है, जिससे क्षेत्र में पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ग्रेट निकोबार विकास परियोजना को लेकर आम जनता में जिज्ञासा बढ़ रही है, ऐसे में इस प्रकार के नियम लागू करने का औचित्य क्या है। उन्होंने आगे कहा कि बर्ड वॉचिंग और समुद्र तट भ्रमण जैसी पर्यटन गतिविधियां स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन रही हैं। “यदि इस तरह के प्रतिबंध जारी रहते हैं, तो इसका सीधा असर उन बेरोजगार युवाओं पर पड़ेगा, जिन्होंने पर्यटन से जुड़े कार्यों में निवेश किया है,” उन्होंने कहा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे प्रतिबंधों पर पुनर्विचार किया जाए और वास्तविक पर्यटकों को हतोत्साहित न किया जाए। जॉन रॉबर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध के बजाय नियंत्रित प्रवेश प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया, जिसमें चेकपोस्ट और निगरानी व्यवस्था हो, न कि जटिल अनुमति प्रक्रिया। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, उन्होंने द्वीपों में राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाओं की कथित उपेक्षा पर भी चिंता जताई। हाल ही में सामने आए एक वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने गांधीनगर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा की स्थिति को “दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक” बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के आसपास झाड़ियां उग आई हैं और उसके चश्मे जैसे हिस्से भी गायब हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की स्थिति राजीव गांधी की प्रतिमा (वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) और जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा (जेएनआरएम) में भी देखी जा सकती है। उन्होंने प्रशासन से इन स्थलों के तत्काल जीर्णोद्धार और उचित रखरखाव की मांग की। साथ ही, यदि देखरेख संभव नहीं है तो प्रतिमाओं को अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का सुझाव दिया। उन्होंने स्थानीय पंचायतों और समुदाय से भी इन सार्वजनिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।