कोलकाता : बंगाल विधानसभा के लिए शनिवार का दिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 'सेवाश्रय' स्वास्थ्य शिविर को लेकर सरकार का पक्ष रखने वाले हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे केवल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी की सबसे चर्चित जनसंपर्क पहल पर सरकार के अब तक के सबसे बड़े हमले के रूप में देखा जा रहा है।
शुक्रवार को फलता से भाजपा विधायक देवांशु पंडा ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए 'सेवाश्रय' शिविरों में कथित अनियमितताओं, सरकारी जमीन के दुरुपयोग और चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही के आरोप उठाए। संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने सदन में स्वीकार किया कि सरकार को 'सेवाश्रय' से जुड़ी कई गंभीर शिकायतें मिली हैं और मुख्यमंत्री शनिवार को इस पूरे मामले पर विस्तृत बयान देंगे।
इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कथित प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर भी अपना पक्ष रख सकती है। तृणमूल शासन के दौरान अभिषेक बनर्जी द्वारा शुरू किया गया 'सेवाश्रय' कार्यक्रम उनकी सबसे लोकप्रिय जनकल्याणकारी पहलों में गिना जाता था।
हालांकि सत्ता परिवर्तन के बाद इन्हीं शिविरों के संचालन, अनुमति, चिकित्सा उपकरणों के उपयोग और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर कई आरोप सामने आए हैं। कुछ मामलों में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है और जांच जारी है।