कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर सियासत तेज हो गई है। खासकर ‘आर्म्ड व्हीकल’ (हथियारबंद वाहन) की मौजूदगी ने राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है।
बुधवार को हुगली के हरिपाल में आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “पहलगाम में जब आतंकवादी हमला करते हैं, तब ये वाहन कहां होते हैं? लेकिन बंगाल में चुनाव के लिए इन्हें भेज दिया गया।” उन्होंने मणिपुर की स्थिति का जिक्र करते हुए केंद्र पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
जनसभा में मुख्यमंत्री ने किसानों को लेकर भी बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आलू किसानों को लेकर गलत प्रचार किया जा रहा है, जबकि राज्य सरकार भंडारण केंद्र, सीधे खरीद और बीमा जैसी सुविधाएं दे रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसानों के लिए परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जा रही है।
उन्होंने किसानों को लॉरी के जरिए फसल भेजने की सलाह दी। ममता बनर्जी ने इस चुनाव को “बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई” बताते हुए कहा कि लोगों की भाषा, खान-पान और अधिकार इस चुनाव के परिणाम पर निर्भर करेंगे। उन्होंने हुगली जिले में विकास कार्यों जैसे रेल लाइन, धार्मिक और सामाजिक परियोजनाओं का भी उल्लेख किया।
ममता ने केंद्र पर 100 दिन के काम, आवास योजना और किसानों के बकाया भुगतान रोकने का आरोप लगाया और आधार से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया। साथ ही ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘युवसाथी’ और ‘दुआरे स्वास्थ्य’ जैसी योजनाओं को जारी रखने का वादा किया। अपील की। वोटर लिस्ट को लेकर भी ममता ने गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि 100 नाम जुड़ने पर केवल 25 लोगों को ही BLO द्वारा स्लिप देने के लिए कहा जा रहा है। अंत में ममता ने कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे स्वयं वोटर लिस्ट और सप्लीमेंट्री लिस्ट के आधार पर घर-घर जाकर वोटर स्लिप पहुंचाएं और लोगों को पहचान पत्र के साथ मतदान के लिए प्रेरित करें।