कोलकाता : सिलीगुड़ी में प्रस्तावित महाकाल मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक साथ राजनीतिक, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर कड़ा संदेश दिया। बेलडांगा में हुई घटना के मद्देनजर उन्होंने दूसरे राज्यों में बंगाल के प्रवासी श्रमिकों पर हो रहे कथित अत्याचारों को लेकर भाजपा पर सीधा हमला बोला और धर्म की वास्तविक परिभाषा को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया।
बांग्ला भाषा बोलना अपराध नहीं
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केवल बांग्ला भाषा बोलने के 'अपराध' में कई भाजपा-शासित राज्यों में प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने असम, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में बंगाल के मजदूरों के साथ मारपीट की जा रही है और कुछ मामलों में हत्या तक हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित राज्य प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए।
सबसे बड़ा धर्म है इंसानियत
धर्म के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने कहा, किसी को पीटना या मारना धर्म नहीं होता, जीवन देना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और विविधता में एकता ही समाज की असली ताकत। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हाथ की पांच उंगलियां अलग-अलग होते हुए भी एक साथ मुट्ठी बनती हैं, वैसे ही अलग-अलग धर्म, भाषा और रंग मिलकर समाज को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि एक ही धर्म या एक ही विचार से देश नहीं चल सकता।
जानबूझकर अशांति का माहौल
SIR के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने भाजपा और चुनाव आयोग पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि SIR के नाम पर बंगाल में जानबूझकर अशांति का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने उत्तर बंगाल आने से पहले बेलडांगा के एक प्रवासी श्रमिक की दूसरे राज्य में पीट-पीटकर हत्या का जिक्र किया और बताया कि बिहार में भी हाल में इसी तरह की घटना हुई है।
सीएम ने आरोप लगाया कि 'डबल इंजन सरकार' एक तरफ लोगों के नाम मतदाता सूची से काट रही है और दूसरी तरफ प्रवासी मजदूरों पर अत्याचार हो रहा है। उन्होंने अंत में कहा कि बंगाल की बहुलतावादी संस्कृति उसकी सबसे बड़ी पहचान और ताकत है और राज्य को आगे बढ़ाने का उनका संकल्प अटल है। साथ ही उन्होंने बेलडांगा के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।