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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर CJP का जश्न, बोला- 'छात्र शक्ति जिंदाबाद'

जंतर-मंतर पर गूंजे जीत के नारे, शिक्षा मंत्री बोले- यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, छात्रों के भविष्य का सवाल था

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे Cockroach Janta Party (CJP) ने इसे छात्रों की बड़ी जीत बताया। शनिवार दोपहर CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "Long Live Student Power" (जिंदाबाद छात्र शक्ति)।

संगठन ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें संस्थापक अभिजीत डिपके और जंतर-मंतर पर मौजूद हजारों प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा होते ही खुशी मनाते और नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं।

जून से जंतर-मंतर पर चल रहा था आंदोलन

CJP के बैनर तले छात्र जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे। प्रदर्शनकारी NEET-UG समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के लिए जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

इस्तीफे के बाद क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?

धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्र सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की वार्ता से कुछ घंटे पहले X पर अपने इस्तीफे की घोषणा की।

उन्होंने लिखा, "जंतर-मंतर और देशभर में उत्पन्न हुई स्थिति को देखते हुए तथा ताकि राष्ट्रविरोधी ताकतें इसका फायदा न उठा सकें, मैंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है।"

प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है और यह मामला उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं था।

उन्होंने कहा, "पहले दिन से ही मैंने पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा। मेरा संकल्प था कि 'एग्जाम माफिया' की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य बर्बाद न हो और किसी छात्र के साथ अन्याय न होने पाए।"

छात्रों की भावनाओं का किया सम्मान

अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी वैध अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि छात्रों के हितों की रक्षा करना हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है।

NEET-UG पेपर लीक बना बड़ा मुद्दा

NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद इसे रद्द कर 21 जून को दोबारा आयोजित कराया गया। इस विवाद के बाद देशभर में छात्रों का आंदोलन तेज हो गया और अंततः सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा।

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