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श्रम संहिताओं के खिलाफ सीटू का राज्य स्तरीय कन्वेंशन

12 फरवरी की हड़ताल से पहले सीटू का राज्य स्तरीय कन्वेंशन

श्रम कानूनों में बदलाव पर सीटू का तीखा विरोध

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम :
चार श्रम संहिताओं के खिलाफ सीटू अंडमान एवं निकोबार राज्य समिति द्वारा 18 जनवरी 2026 को पोर्ट ब्लेयर में एक राज्य स्तरीय कन्वेंशन का आयोजन किया गया। यह कन्वेंशन आगामी 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित अखिल भारतीय आम हड़ताल के समर्थन में चलाए जा रहे अभियान का अहम हिस्सा था। कन्वेंशन में बड़ी संख्या में विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े श्रमिकों ने भाग लिया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुटता दिखाई।

कन्वेंशन का उद्घाटन करते हुए सीटू के महासचिव बी. चंद्रचूड़न ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं लागू करना पूरी तरह से श्रमिक विरोधी कदम है, जिससे मजदूरों के अधिकारों पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संहिताओं के जरिए श्रमिकों की सुरक्षा, स्थायित्व और सामाजिक सुरक्षा को कमजोर किया जा रहा है, जबकि कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।

बी. चंद्रचूड़न ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में श्रमिकों की लंबित मांगों की अनदेखी पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि द्वीपों में रोजगार, मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने श्रमिकों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष को और मजबूत करें।

इस अवसर पर सीटू के उपाध्यक्ष डी. अय्यप्पन ने चारों श्रम संहिताओं की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि ये कानून श्रमिकों के हित में नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं से नौकरी की सुरक्षा कमजोर होगी और ट्रेड यूनियनों की भूमिका सीमित हो जाएगी। उन्होंने बिजली संशोधन विधेयक और बीज विधेयक का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ये विधेयक भी आम जनता और किसानों के खिलाफ हैं।

कन्वेंशन के दौरान आगामी दिनों में चलाए जाने वाले क्षेत्रव्यापी अभियान की रूपरेखा तय की गई। इस सत्र की अध्यक्षता आर. सुरेंद्रन पिल्लै ने की। वक्ताओं ने 12 फरवरी की अखिल भारतीय आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क, बैठकों और जागरूकता अभियानों पर जोर दिया। कन्वेंशन में मौजूद श्रमिकों ने श्रम संहिताओं के खिलाफ संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया।

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