साइबर हमलों से निपटने के लिए 35 जवानों को एडवांस प्रशिक्षण, ‘साइबर कमांडो’ मिशन को मिलेगी नई ताकत 
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डिजिटल जंग के लिए तैयार हो रहा CISF, IIT मद्रास में बन रहे साइबर योद्धा

CERT-In मान्यता, ISO/IEC 27001 आधारित प्रशिक्षण और 1600 से अधिक जवानों की साइबर ट्रेनिंग के साथ CISF हवाई अड्डों से परमाणु संयंत्रों तक संवेदनशील प्रतिष्ठानों के लिए ‘फुल-स्पेक्ट्रम’ डिजिटल सुरक्षा ढाल गढ़ रहा है

देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं और रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अब डिजिटल सुरक्षा के मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाने में जुट गया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के 5,000 साइबर कमांडो तैयार करने के विजन को आगे बढ़ाते हुए CISF ने अपने जवानों के लिए विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

इस पहल के तहत बल के 35 जवान Indian Institute of Technology Madras में छह सप्ताह का उन्नत साइबर सुरक्षा कोर्स कर रहे हैं। आठ जून से शुरू हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य जवानों को तेजी से बदलते डिजिटल खतरों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।

नेटवर्क सुरक्षा से लेकर AI तक की मिलेगी ट्रेनिंग

प्रशिक्षण कार्यक्रम को आधुनिक साइबर चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें जवानों को साइबर सुरक्षा के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेषज्ञता दी जा रही है।

कोर्स के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को नेटवर्क और क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर हमलों की पहचान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, इंसिडेंट रिस्पॉन्स मैनेजमेंट और साइबर कानून और नियामकीय ढांचा जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के सुरक्षा खतरों में साइबर हमलों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुरक्षा बलों का तकनीकी रूप से दक्ष होना समय की मांग है।

1600 से अधिक जवान पहले ही ले चुके हैं प्रशिक्षण

CISF पिछले कुछ वर्षों से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। बल गृह मंत्रालय के तहत कार्यरत Indian Cyber Crime Coordination Centre के क्षमता निर्माण अभियान में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।

इसी प्रयास के तहत अब तक 1600 से अधिक जवानों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में साइबर सुरक्षा और साइबर कमांडो से जुड़े विशेष प्रशिक्षण दिए जा चुके हैं।

इन संस्थानों में National Forensic Sciences University, Defence Institute of Advanced Technology, Sardar Vallabhbhai Patel National Police Academy शामिल हैं।

CERT-In मान्यता की दिशा में बढ़ रहा CISF

बल अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में संस्थागत पहचान मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। CISF स्वयं को एक अधिकृत ‘इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑडिटिंग ऑर्गेनाइजेशन’ के रूप में पंजीकृत कराने की प्रक्रिया में है।

इसके लिए जवानों को सूचना सुरक्षा और ISO/IEC 27001 मानकों से जुड़े विशेष प्रमाणन कार्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे बल के भीतर साइबर ऑडिट, जोखिम प्रबंधन और सुरक्षा अनुपालन जैसी विशेषज्ञ क्षमताएं विकसित की जा सकेंगी।

देश के संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर फोकस

CISF देश के कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का जिम्मा संभालता है। इनमें हवाई अड्डे, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, बंदरगाह, मेट्रो नेटवर्क, सरकारी संस्थान आदि शामिल हैं।

डिजिटल तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण इन प्रतिष्ठानों पर साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में भौतिक सुरक्षा के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना CISF की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।

सुरक्षा सलाहकार से ‘फुल-स्पेक्ट्रम सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ बनने की ओर

CISF पहले से ही सरकारी और निजी संस्थानों को सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से संबंधित तकनीकी परामर्श प्रदान करता रहा है। देश की कई प्रतिष्ठित परियोजनाओं में इसकी विशेषज्ञता का उपयोग किया जा चुका है।

बल ने Shri Ram Janmabhoomi, विभिन्न बिजनेस पार्क, Indian Institute of Management Indore, Banaras Hindu University, Delhi Police Headquarters जैसे संस्थानों को सुरक्षा संबंधी परामर्श उपलब्ध कराया है। अब साइबर सुरक्षा में विशेषज्ञता विकसित करने के बाद CISF अपनी सेवाओं का दायरा और बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

जल्द मिलेगी साइबर सुरक्षा कंसल्टेंसी सेवा

अधिकारियों के अनुसार भविष्य में CISF सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को साइबर सुरक्षा संबंधी परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा। इससे बल केवल भौतिक सुरक्षा एजेंसी नहीं रहेगा, बल्कि एक समग्र सुरक्षा समाधान प्रदाता के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा।

डिजिटल युग में साइबर हमले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। ऐसे में CISF का यह कदम न केवल बल की क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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