सन्मार्ग संवाददाता
नई दिल्ली/कोलकाता : सीआईएसएफ में बीते एक साल के दौरान मानव संसाधन (HR) नीति में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिले हैं। इन बदलावों ने न केवल हजारों बलकर्मियों की वर्षों से लंबित पदोन्नति को वास्तविकता में बदला है, बल्कि पोस्टिंग को भी कर्मियों की पसंद के अनुसार निर्धारित किया गया है, जिससे पूरे बल में संतोष और ऊर्जा का संचार हुआ है।
पदोन्नति में रिकॉर्ड प्रगति
2025 के भीतर, 13,520 अराजपत्रित अधिकारी और 406 राजपत्रित अधिकारी समय से पहले पदोन्नत किए गए — यह संख्या बल के कुल कर्मियों का लगभग 9% है। पहली बार, डीआईजी से लेकर आईजी स्तर तक की पदोन्नति विभागीय समिति द्वारा कैलेंडर वर्ष के भीतर पूरी की गई। इससे अन्य रैंकों की डीपीसी भी समय पर संपन्न हुई, और रिक्तियों के अनुसार त्वरित पदोन्नति संभव हुई।
कांस्टेबल स्तर के कर्मियों का कहना है कि समय पर पदोन्नति ने उनमें "मनोबल, आत्मगौरव और अपनापन" की भावना को मजबूत किया है।
पोस्टिंग नीति में पारदर्शिता और प्राथमिकता
सीआईएसएफ में अब पोस्टिंग केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सॉफ़्टवेयर-संचालित प्रणाली के ज़रिए की जा रही है।
सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए 100% पसंद आधारित पोस्टिंग
महिला कर्मियों को 99% प्राथमिकता पूर्ण
कांस्टेबल/जीडी में 92.5% पसंद आधारित पोस्टिंग
कुल मिलाकर 86% कर्मियों को पसंदीदा पोस्टिंग मिली
इस प्रणाली से पोस्टिंग से जुड़ी शिकायतों में 66% की गिरावट आई है — जो इन सुधारों की सफलता और विश्वास के स्तर को दर्शाता है।
बलकर्मियों की खुशी, बल की मजबूती
सीआईएसएफ के इन बदलावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक संतुष्ट, प्रेरित और समर्थ बलकर्मी, संगठन को केवल मजबूत ही नहीं बनाता, बल्कि बेहतर सुरक्षा का प्रहरी भी बनता है। बल के अध्यक्षों का मानना है कि यह बदलाव 'केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संस्कृति में बदलाव' का संकेत है।
तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच, ये सुधार सुनिश्चित करते हैं कि सीआईएसएफ न केवल अनुशासित और दक्ष बना रहे, बल्कि उसके सदस्य बेहतर कार्य-जीवन संतुलन के साथ अधिक खुशहाल भी हों।