सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान–निकोबार में बाल दिवस के अवसर पर बच्चों के उत्साह को नई दिशा देने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग और अंडमान निकोबार चेस एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित बाल चेस उत्सव 2025 स्कूल चेस चैंपियनशिप का शुभारंभ 14 नवंबर को डोलीगंज स्थित आईटीआई कैंपस में किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्रों में शतरंज के प्रति रुचि बढ़ाना, उनकी विश्लेषण क्षमता को निखारना और द्वीपसमूह की उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है।
दो दिवसीय इस भव्य प्रतियोगिता में छह अलग-अलग आयु वर्ग—अंडर 7, 9, 11, 13, 15 और 19—में मैच आयोजित किए जा रहे हैं। विशेष बात यह है कि यह चैंपियनशिप झारखंड में दिसंबर 2025 में होने वाली नेशनल जूनियर (अंडर-19) चैंपियनशिप के लिए चयन आधार के रूप में भी काम करेगी। इससे प्रतिभागियों में उत्सुकता और तैयारी का स्तर पहले से ज्यादा देखने को मिल रहा है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सचिव ज्योति कुमारी ने शतरंज की बिसात पर पहली चाल चलकर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बाल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शतरंज बच्चों की एकाग्रता, समस्या-समाधान की क्षमता और धैर्य को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल बच्चों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना पैदा करते हैं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर द्वीपसमूह का नाम रोशन करने की प्रेरणा भी देते हैं।
इस अवसर पर शिक्षा एवं खेल निदेशक विक्रम सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने बच्चों को खेल में गंभीरता और अनुशासन के साथ हिस्सा लेने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने छात्रों को नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य, जोनल और स्कूल पुस्तकालयों का उपयोग बच्चों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किताबों और खेलों से जुड़ाव बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग और उससे होने वाले नकारात्मक प्रभावों से दूर रख सकता है।
प्रतियोगिता में इस वर्ष लगभग 400 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है, जो अंडर-7 से लेकर अंडर-19 तक सभी वर्गों में शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि अंडमान–निकोबार के बच्चों में शतरंज के प्रति लगाव तेजी से बढ़ रहा है। यह आयोजन द्वीपसमूह में आयोजित अब तक की सबसे बड़ी स्कूल-स्तरीय चेस प्रतियोगिताओं में से एक माना जा रहा है।
बाल दिवस के दिन शुरू हुआ यह चेस उत्सव न केवल प्रतियोगिता का मंच है, बल्कि बच्चों में बौद्धिक विकास, अनुशासन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का एक सार्थक प्रयास भी है।