नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने वाले हर पोस्ट, वीडियो और फोटो की पहले से निगरानी कर कथित गैरकानूनी कंटेंट हटाने की मांग पर Google और Meta ने दिल्ली हाईकोर्ट में साफ कहा है कि यह न तो कानूनी रूप से संभव है और न ही तकनीकी तौर पर व्यावहारिक। दोनों कंपनियों ने अदालत से कहा कि उन्हें "सुपर सेंसर" बनाकर यह तय करने की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती कि कौन-सा कंटेंट कानून के दायरे में है और कौन-सा नहीं।
यह मामला अधिवक्ता वैभव सिंह की याचिका से जुड़ा है। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट की स्वतः पहचान कर हटाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जो कानून का उल्लंघन करता हो। विवाद उस समय शुरू हुआ जब पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े आबकारी नीति मामले की अदालत की वर्चुअल सुनवाई के ऑडियो और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह दिल्ली हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन है।
अप्रैल में सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए अहम सवाल उठाया था कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे पोस्ट स्वतः पहचानकर हटाने के लिए बाध्य किया जा सकता है, जो किसी मौजूदा कानून या अदालत के आदेश का उल्लंघन करते हों।
Meta ने अदालत में दायर अपने जवाब में कहा कि किसी कंटेंट को गैरकानूनी घोषित करना केवल उसके शब्दों या वीडियो को देखकर संभव नहीं है। इसके लिए कंटेंट का स्रोत, संदर्भ, लागू कानून और संबंधित अदालत के आदेशों की जांच जरूरी होती है। कंपनी का कहना है कि यदि यह जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स पर डाल दी गई तो उन्हें "सुपर सेंसर" की भूमिका निभानी पड़ेगी, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहले ही चेतावनी दे चुका है।
कंपनी ने यह भी कहा कि आईटी नियम, 2021 (Information Technology Rules, 2021) के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को केवल "उचित प्रयास" (Reasonable Efforts) करने की जिम्मेदारी दी गई है ताकि उपयोगकर्ता गैरकानूनी सामग्री पोस्ट न करें। नियमों में हर पोस्ट की पूर्व जांच या स्वतंत्र रूप से उसकी वैधता तय करने का कोई प्रावधान नहीं है।
Google ने भी इसी तरह का पक्ष रखते हुए कहा कि अरबों यूजर-जनित पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों की लगातार निगरानी करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। कंपनी ने कहा कि वह तभी प्रभावी कार्रवाई कर सकती है जब किसी विशेष पोस्ट, वीडियो या URL की स्पष्ट पहचान कर शिकायत की जाए।
Meta ने अदालत को बताया कि Facebook के दुनिया भर में 2.9 अरब से अधिक और Instagram के 1 अरब से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं। हर दिन करोड़ों पोस्ट, कमेंट, वीडियो और तस्वीरें अपलोड होती हैं। ऐसे में हर कंटेंट की पहले से जांच करना "अव्यावहारिक ही नहीं, बल्कि लगभग असंभव" है। कंपनी ने कहा कि बिना किसी विशेष URL या विवादित कंटेंट की पहचान के व्यापक निगरानी संबंधी किसी आदेश का पालन करना संभव नहीं होगा।