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टीएमसी की रैली में घमासान, हाजरा बना रणक्षेत्र

टीएमसी-भाजपा समर्थकों में हिंसक भिड़ंत

कोलकाता : बारुईपुर में नाबालिग से कथित दुष्कर्म एवं हत्या की घटना के विरोध में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) द्वारा बालीगंज फांड़ी से लेकर हाजरा तक रैली निकाली गई जो राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गई। रैली के दौरान भाजपा और टीएमसी समर्थक कई स्थानों पर आमने-सामने आ गए। इसके नारेबाजी से शुरू हुई और विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की, हाथापाई, पथराव और अंडेबाजी हुई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में करीब 45 लोगों के घायल होने की सूचना है। घायलों को उपचार के लिए एसएसकेएम अस्पताल भेजा गया। हालात पर काबू पाने के लिए कोलकाता पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी मोर्चा संभालना पड़ा।

शुरुआत से ही टकराव के संकेत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रैली शुरू होने से पहले ही बालीगंज फांड़ी पर टीएमसी के साथ-साथ बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक जमा हो गए थे। उन्होंने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भी पलटवार किया। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस धक्का-मुक्की में बदल गई। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन तनाव पूरे रूट पर बना रहा। हाजरा पहुंचते ही माहौल और बिगड़ गया। भाजपा समर्थकों ने "चोर-चोर" के नारे लगाए, जिसके बाद दोनों पक्षों में जमकर भिड़ंत हुई। इस दौरान पत्थर और अंडे फेंके गए। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों के पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की करने की सूचना है।

ममता ने पुलिस को ठहराया जिम्मेदार

घटना के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हिंसा के लिए भाजपा से अधिक पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत से अनुमति मिलने के बावजूद पुलिस रैली को सुरक्षा देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही। ममता ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम कर रही है।

भाजपा का पलटवार

भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि झड़प की शुरुआत टीएमसी कार्यकर्ताओं ने की। पार्टी का आरोप है कि उसके समर्थकों को उकसाया गया, जिसके बाद विवाद बढ़ा। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।

हाई कोर्ट की शर्तों के बाद निकली थी रैली

कलकत्ता हाई कोर्ट ने रैली को दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक निकालने तथा इसमें अधिकतम 1,000 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी थी। अदालत की शर्तों के बावजूद रैली के शुरुआती चरण से ही तनाव बना रहा और अंततः हाजरा में यह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन हिंसक टकराव में बदल गया।

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