5वें सेमेस्टर के खराब नतीजों से चिंतित था सीयू प्रशासन
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कलकत्ता यूनिवर्सिटी के 5वें सेमेस्टर में साइंस और मैथ विषयों के छात्रों की लगातार बढ़ती फेल संख्या और असामान्य नतीजों से अधिकारी बेहद चिंतित थे। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए बनाई गई विशेष कमेटी ने हाल ही में वाइस-चांसलर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिस पर आगामी सिंडिकेट बैठक में मुहर लग सकती है। कमेटी की जांच में खुलासा हुआ कि मौजूदा 'मेजर' सब्जेक्ट लेआउट का गलत ढांचा छात्रों की नाकामी की मुख्य वजह था। पुराने पैटर्न के तहत शुरुआती सेमेस्टर में पढ़ाई का दबाव बेहद कम और आखिरी चरणों में अचानक बहुत ज्यादा हो जाता था, क्योंकि पहले-दूसरे सेमेस्टर में सिर्फ एक, तीसरे में दो, चौथे में तीन और पांचवें-छठे सेमेस्टर में चार-चार पेपर पढ़ने पड़ते थे। इस भारी असंतुलन को दूर करने के लिए कमेटी ने पाठ्यक्रम के पुनर्गठन का एक नया और व्यावहारिक प्रस्ताव पेश किया है।
सेमेस्टर पेपर कम हुए, आसान हुई परीक्षा
नई सिफारिश के मुताबिक अब पहले से तीसरे सेमेस्टर तक दो-दो और चौथे से छठे सेमेस्टर तक तीन-तीन पेपर पढ़ने होंगे। साथ ही, थ्योरी और प्रैक्टिकल मिलाकर कुल 30% अंक लाने पर ही पास करने का प्रावधान किया गया है, जो पहले करीब 40% था। हालांकि शिक्षक मानते हैं कि मेजर-माइनर के बदलते स्वरूप में छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है।