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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: चश्मदीद मंटू से सीआईडी ने की पूछताछ!

शूटर को नहीं थी गाड़ी में उसके होने की जानकारी या काले शीशे ने बचा ली जान

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

मध्यमग्राम : घर से महज 50 मीटर दूर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में अभियुक्तों की गोलियों से घायल ड्राइवर बुद्धदेव बेरा जहां अभी भी अस्पताल में इलाजरत है। वहीं चंद्रनाथ के लिए काम करने वाले बारासात निवासी मंटू मंडल भी ट्रॉमा से निकल नहीं पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बारासात के विजयनगर निवासी मोंटू, जो चंद्रनाथ रथ के सहयोगी के रूप में काम करते थे, उस रात कार की पिछली सीट पर बैठे थे। उनकी आंखों के सामने उनके साथी को गोलियों से भून दिया गया। ‘फीयर फोबिया’ में पड़े मंटू के घरवालों का कहना है कि वह आज भी घटना का याद कर सिहर उठ रहा है। हालांकि मंटू व उसके परिवार से सीआईडी के जांचकर्ताओं ने घर जाकर पूछताछ की है। मंटू ने सीआईडी को बताया कि घटना के समय वह गाड़ी की पिछली सीट पर चंद्रनाथ की तरफ ही बैठे थे। मुजीबर रोड से गुजरते समय जैसे ही उनकी गाड़ी एक बहुमंजिला इमारत के पास रुकी, अचानक एक चार पहिया वाहन ने उनका रास्ता रोक दिया। मंटू के अनुसार, हमलावरों ने बेहद सटीक तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया जैसे उन्हें पल-पल की जानकारी मिल रही हो। शूटर को पता था कि चंद्रनाथ कहां बैठे हैं। चंद्रनाथ पर एक हमलावर ने सामने के शीशे से चंद्रनाथ के सीने और सिर पर गोलियां दागीं, जबकि दूसरे ने चालक की तरफ से फायरिंग की। अपनी जान बचाने के लिए मंटू सीट के नीचे झुक गए। उसका कहना है कि मात्र 45 सेकंड के भीतर सब कुछ खत्म हो गया और हमलावर वहां से फरार हो गए। अनुमान है कि हमलावरों को मंटू के बारे में संभवतः जानकारी नहीं थी अथवा चंद्रनाथ की गाड़ी के काले शीशे के कारण वे उसे देख नहीं पाये जिस कारण वह बच पाया।

‘फीयर फोबिया’ से जूझ रहे मंटू को नहीं मिली थी स्थानीयों से कोई मदद

मंटू के परिवारवालों का कहना है कि मंटू ने उन्हें बताया था कि चंद्रनाथ अपनी सीट पर लहूलुहान पड़े थे और ड्राइवर बुद्धदेव बेरा तड़प रहे थे। वह खुद गाड़ी चलाना जानते थे, इसलिए भारी दहशत के बावजूद उसने हिम्मत जुटाई। उसने घायल बुद्धदेव को किसी तरह पिछली सीट पर खींचा और अस्पताल की ओर चल दिए। हालांकि, उसका कहना है कि स्थानीय लोगों से उसे कोई मदद नहीं मिली। उसने अंततः जेशोर रोड स्थित एक नर्सिंग होम में गाड़ी रोकी, जहां विधानसभा के स्टिकर को देखकर कर्मचारियों ने दोनों घायलों को अंदर पहुंचाया। मंटू के भाई झंटू ने बताया कि उनका परिवार अब उसे सहारा दे रहा है ताकि वह इस मानसिक सदमे से बाहर आ सकें। परिवार का मानना है कि यदि स्थानीय लोग तुरंत मदद करते, तो शायद ड्राइवर का इलाज और पहले शुरू हो पाता। फिलहाल, सीआईडी मंटू के बयान को इस जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।

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