निधि, सन्मार्ग संवाददाता
मध्यमग्राम : शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहायक और पूर्व वायुसेना कर्मी चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जांच अधिकारियों ने हत्याकांड में इस्तेमाल की गई दूसरी बाइक को बारासात के 11 नंबर रेल गेट के पास से बरामद कर लिया है। इस बाइक का नंबर WB 24B M4052 बताया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरी साजिश में केवल दो बाइक सवार ही नहीं, बल्कि एक अन्य चार पहिया वाहन भी शामिल था, जिसमें 8 हमलावर सवार थे। पुलिस को संदेह है कि वह गाड़ी दूसरे राज्य की है, जिसकी तलाश में अब उत्तर प्रदेश तक दबिश दी जा रही है। इस क्रम में पुलिस को कुछ फुटेज हाथ लगे थे जिसके आधार पर प्राथमिक अनुमान है कि चंद्रनाथ पर गोलियां चलाने वाले अन्य राज्य के शार्प शूटर को सुपारी दी गयी थी और संभवतः उसके निकलने की भी व्यवस्था की गयी है। पहले ही पुलिस ने हत्याकांड में स्थानीय गैंग के लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया है जिस क्रम में 3 संदिग्धों से पूछताछ शुरू की गयी। यहां बता दें कि पुलिस ने उक्त बाइक से पहले बुधवार को ही एयरपोर्ट के ढाई नंबर गेट के पास से एक बाइक की थी। उसी के पास से एक अन्य कार बरामद भी बरामद की गयी है जो गैर राज्य का बताया गया है। हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, हत्यारों की चालाकी भी सामने आ रही है।
हत्यारों की तलाश में राज्यभर में व बोर्डर इलाकों में चल रही छापेमारी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बरामद पहली बाइक आसनसोल के बिभास भट्टाचार्य के नाम पर पंजीकृत थी, लेकिन उस पते पर अब कोई और रहता है। वहीं, बरामद कार की नंबर प्लेट भी फर्जी निकली। कार सिलीगुड़ी आरटीओ में पंजीकृत है, लेकिन असली मालिक का दावा है कि उसकी गाड़ी अभी भी उसके पास ही है। इससे स्पष्ट होता है कि हमलावरों ने पहचान छुपाने के लिए चोरी के वाहनों या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया है। शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर तृणमूल पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। अधिकारी ने दावा किया कि यह एक सुनियोजित हत्या है अतः इन बिंदुओं पर पुलिस फोन कॉल्स के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि चंद्रनाथ से संबंधित हुई किसी भी कॉल या लिंक से अभियुक्तों तक पहुंचा जा सके। फिलहाल, पुलिस अपराधियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज और कॉल डंप डेटा खंगाल रही है, ताकि उत्तर प्रदेश और बंगाल के बीच जुड़े इस 'मिसिंग लिंक' का पर्दाफाश किया जा सके।