निधि, सन्मार्ग संवाददाता
मध्यमग्राम : शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में अब जांच का दायरा जेल की सलाखों तक पहुंच गया है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस हत्याकांड का 'ब्लूप्रिंट' किसी जेल के भीतर बैठ कर तैयार किया गया हो सकता है। पुलिस अब पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों की जेलों में बंद पेशेवर अपराधियों और 'सुपारी किलर्स' की कुंडली खंगाल रही है। जिस सटीकता के साथ इस वारदात को अंजाम दिया गया। भीड़भाड़ वाली सड़क पर गाड़ी घेरकर पॉइंट ब्लैंक रेंज से फायरिंग करना और महज 50 सेकंड में ऑपरेशन खत्म कर फरार हो जाना—वह पेशेवर शार्प शूटरों की संलिप्तता की ओर साफ इशारा करता है। विशेष जांच दल (SIT) का मानना है कि भले ही हत्या के लिए बाहरी राज्यों के शूटरों का इस्तेमाल किया गया हो, लेकिन बिना स्थानीय मदद के यह संभव नहीं था। इलाके की रेकी करने, गलियों से भागने का रास्ता (एग्जिट रूट) तैयार करने और रसद सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय अपराधियों का सहारा लिया गया है।
एक महीने पहले बुना गया था मौत का जाल !
पुलिस अब मध्यमध्यमग्राम, बारासात और आसपास के पुराने गैंगस्टरों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। इसके लिए स्थानीय थानों के पुराने अधिकारियों की मदद ली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाल के दिनों में किस अपराधी ने बाहरी गैंग से संपर्क किया था। बताया जा रहा है कि कुछ त्यथ व संकेतों से सामने आ रहा है कि चंद्रनाथ की हत्या की साजिश करीब एक से डेढ़ महीने पहले ही रच ली गई थी। पुलिस उन तमाम कड़ियों को जोड़ रही है कि आखिर एक महीने पहले चंद्रनाथ का किसी से कोई विवाद हुआ था या नहीं। वारदात के बाद हमलावरों का इतनी आसानी से ओझल हो जाना साबित करता है कि उन्होंने इलाके की भौगोलिक स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया था। फिलहाल, सीआईडी (CID), एसटीएफ (STF) और जिला पुलिस की संयुक्त टीम सीमावर्ती इलाकों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए हत्यारों के सटीक ठिकाने का पता लगाने में जुटी है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए पड़ोसी राज्यों की एसटीएफ से भी संपर्क साधा गया है।