बीमार के लिए मददगार एक कुत्ता 
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‘दिव्यांगों की मदद के लिए कुत्तों के इस्तेमाल संबंधी SOP को अंतिम रूप दे केंद्र’

दिल्ली हाई कोर्ट का निर्देश

Kamlesh Pandey

नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिव्यांगजन की सहायता के लिए प्रशिक्षित सहायक कुत्तों के इस्तेमाल संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को अंतिम रूप देने को कहा है। पीठ ने कहा कि उसे उम्मीद है कि अधिकारी इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 7 जनवरी, 2027 तक SOP को अंतिम रूप दे देंगे। अदालत ने धनंजय संजोगता फाउंडेशन की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता के लिए ‘थेरेपी’ या अन्य सहायक पशुओं के इस्तेमाल संबंधी नियमों का कोई ढांचा नहीं होने का मुद्दा उठाया गया है।

SOP को जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा

पशुपालन एवं डेयरी विभाग और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के वकील ने 6 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान ‘भारत में दिव्यांगजन की सहायता के लिए सहायक कुत्तों’ के संबंध में तैयार SOP का मसौदा अदालत के समक्ष पेश किया था। वकील ने बताया था कि इस मसौदे पर आम लोगों और सभी संबंधित पक्षों से आपत्तियां मांगी गई हैं तथा SOP को जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। SOP में कुछ सुझाव शामिल करने की बात भी सामने आई। इनमें सहायक कुत्तों का एक रजिस्टर तैयार करना और प्रत्येक कुत्ते को पंजीकरण संख्या देना शामिल है। यह भी सुझाव दिया गया कि सभी सहायक कुत्तों के गले में पहले से निर्धारित रंग का एक विशेष पट्टा होना चाहिए, ताकि आम लोग एवं सुरक्षाकर्मी उन्हें पहचान सकें और यह समझ सकें कि ये सहायता के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुत्ते हैं तथा इनसे किसी तरह का नुकसान होने की आशंका नहीं है।

कुत्तों के मुंह पर सुरक्षा के लिए जालीदार पट्टा लगाया जाए

इसके अलावा, यह सुझाव दिया गया कि सिनेमाघरों, मॉल और अस्पतालों जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ले जाते समय इन कुत्तों के मुंह पर सुरक्षा के लिए जालीदार पट्टा लगाया जाए, ताकि शांति और व्यवस्था बनी रहे। केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि इन सुझावों पर विचार करने और इन्हें SOP में शामिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। संगठन ने 2024 में एक जनहित याचिका दायर कर पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 को चुनौती दी थी। याचिका में दलील दी गई थी कि इन नियमों में दिव्यांग व्यक्तियों को आवारा पशुओं के हमलों से बचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है और ये दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन करते हैं।

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