नयी दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह इन नियमों पर दोबारा विचार करेगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार को विवादित नियमों को हटाने का सुझाव दिया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस मामले पर विचार कर रही है और नियमों को हटाने की दिशा में कदम उठाएगी।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी और प्रत्येक छात्र के हितों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि किसी भी वर्ग के छात्र में असंतोष या आशंका की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- रेगुलेशंस पर दोबारा विचार क्यों नहीं करते?
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह UGC के विवादित रेगुलेशंस पर नए सिरे से विचार क्यों नहीं करती? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार चाहती है कि सभी छात्रों के हित सुरक्षित रहें और किसी भी वर्ग को इन नियमों को लेकर असंतोष या असुरक्षा महसूस न हो।
मेहता ने कहा कि सरकार युवा पीढ़ी के हितों को ध्यान में रखते हुए इन नियमों की समीक्षा के लिए एक कमेटी गठित करने पर भी विचार कर रही है। इस कमेटी के माध्यम से विवादित प्रावधानों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी नियमों पर रोक
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस पर रोक लगा दी थी। अदालत ने नियमों में मौजूद अस्पष्टता और उनके संभावित दुरुपयोग की आशंका को लेकर चिंता जताई थी। इसके साथ ही अदालत ने 2012 के पुराने नियमों को जारी रखने की अनुमति दी थी। इसके बाद से ही नए नियमों को लेकर कानूनी और शैक्षणिक स्तर पर बहस जारी है। अगस्त में भी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह इन नियमों पर पुनर्विचार कर रही है।
पायल तड़वी और रोहित वेमुला के मामलों से जुड़ा है विवाद
UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस का मामला आबिदा सलीम तडवी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया याचिका से जुड़ा है। वर्ष 2019 में पायल तड़वी और रोहित वेमुला की माताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और छात्रों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका में कैंपस के भीतर जातिगत भेदभाव की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी। इसी के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने और भेदभाव रोकने के लिए UGC के नियमों का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया।
जवाबी हलफनामे के लिए मांगा समयबद्ध निर्देश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि शिक्षाविदों और इस क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों ने नए नियमों को लेकर कई सवाल और आपत्तियां उठाई हैं। इन मुद्दों की सूची तैयार कर सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने UGC को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समयबद्ध निर्देश देने की मांग की।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि जवाबी हलफनामे के बजाय अदालत मौखिक रूप से एक सुझाव दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत किसी की सलाहकार नहीं है, लेकिन उसने अपनी ओर से एक सुझाव दिया है। अब आगे इस मामले में क्या होता है, यह देखना होगा।