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रिहैब सेंटर में संदिग्ध मौत से हड़कंप

सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल, 7 गिरफ्तार

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : बारासात के हाबरा थाना अंतर्गत बदरहाट इलाके में स्थित एक निजी नशामुक्ति केंद्र (रिहैब सेंटर) में हुई 54 वर्षीय मृत्युंजय दास की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रिहैब सेंटर से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को इन आरोपियों को बारासात अदालत में पेश किया गया, जहाँ पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए उनकी पाँच दिनों की हिरासत माँगी है।

क्या है पूरा मामला?

मृतक मृत्युंजय दास हाबरा के बेलघरिया बाईपास इलाके के रहने वाला था। परिजनों के अनुसार, उसे 19 तारीख की रात को इस निजी रिहैब सेंटर में भर्ती कराया गया था। भर्ती करने के मात्र दो दिन बाद, 22 तारीख की दोपहर को परिवार के पास फोन आया कि मृत्युंजय की हालत बहुत गंभीर है और उन्हें तुरंत हाबरा राज्य सामान्य अस्पताल पहुँचने को कहा गया। जब परिजन अस्पताल पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि मृत्युंजय की मृत्यु पहले ही हो चुकी है। परिजनों का आरोप है कि उस समय रिहैब सेंटर के लोग उन पर जल्दबाजी में आधार कार्ड देने का दबाव बना रहे थे।

सीसीटीवी फुटेज से हुआ खौफनाक खुलासा

जब परिजनों ने मृत्युंजय की अचानक मौत पर सवाल उठाए, तो रिहैब अधिकारियों ने इसे 'गैस की समस्या' बताकर टालने की कोशिश की। हालांकि, जब परिवार ने रिहैब सेंटर के सीसीटीवी फुटेज देखे, तो उनके होश उड़ गए। परिजनों का दावा है कि फुटेज में साफ दिख रहा था कि मृत्युंजय के हाथ-पांव गमछे से बंधे हुए थे, मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था और गले में फंदा लगाने जैसे निशान थे। इस दृश्य ने 'नशामुक्ति' के नाम पर चल रहे इस केंद्र के क्रूर चेहरे को उजागर कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

घटना के बाद रिहैब सेंटर के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली और कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हाबरा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं के तहत जाँच शुरू की और सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का मानना है कि रिहैब सेंटर के भीतर मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का पता चलेगा। फिलहाल, पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस साजिश में और भी लोग शामिल हैं और क्या पहले भी वहाँ इस तरह की घटनाएँ हुई हैं।

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