नयी दिल्ली : CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर चल रहे विवादों के बीच आज बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि OSM सिस्टम पहली बार प्रयोग नहीं किया गया है, इसे पहले भी इस्तेमाल किया गया था। स्कूल शिक्षा के सचिव संजय कुमार ने कहा, ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर छात्रों के अंदर कुछ संदेह है, इसको लेकर हम इसपर स्पष्ट करने के लिए आए हैं । यह चिंता जताई जा रही है, बच्चों को ज़्यादा नंबर आने चाहिए थे, लेकिन कम आए। विश्व में कई देश में यह सिस्टम उपयोग होता है। छात्रों के लिए री- इवैल्यूएशन की व्यवस्था उपलब्ध है।
संजय कुमार ने कहा, "सभी बच्चों का कल्याण हमारे लिए सर्वोपरि है। हम नहीं चाहते कि छात्रों को ऐसा महसूस हो कि उनकी योग्यता का सम्मान नहीं किया जा रहा है। CBSE में पुनर्मूल्यांकन का विकल्प हमेशा से उपलब्ध रहा है। CBSE ने यह निर्णय लिया है कि अगर आप कॉपी देखना चाहते है और अगर आपको लगता है कि कॉपी ग़लत चेक हुई है, तो उसके लिए अब सिर्फ़ 100 रुपये लिए जाएंगे। " बता दें कि 700 रुपए में जो कॉपी चेकिंग होती थी, वह अब 100 रुपये कर दी गई है। हर सवाल की चेकिंग के अब 25 रुपए प्रति सवाल कर दिया गया है।
बोर्ड ने बताया कि स्कैन को तीन लेयर की सिक्योरिटी में किया गया है। इस OSM करने से हमारे पास यह सुविधा हो गई कि इसे हम रीजनल ऑफिस के बाहर भी कॉपी चेक करवा सकते है। ऑनलाइन सिस्टम होने से टोटेटलिंग में जो गलतियां होती थीं, वे दूर हो गईं, टीचर को इस सिस्टम को लेकर ट्रेनिंग दे गई । 17 मार्च से इस सिस्टम की शुरुआत की गई। ऐसी कुल 13 हज़ार आंसर शीट्स ऐसी थीं जो स्कैन करने के बाद भी सही से स्कैन नहीं हो पाईं । इन कॉपियों को मैनुअली चेक किया गया।
इस बार जब 12वीं की 98 लाख आंसर शीट को स्कैन किया गया। स्कैन को तीन लेयर की सिक्योरिटी में किया गया। टीचर को इस सिस्टम को लेकर ट्रेनिंग दे गई। 17 मार्च से इस सिस्टम की शुरुआत की गई।