नई दिल्लीः सीबीआई ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य को शराब नीति मामले में आरोपमुक्त करने के विशेष अदालत के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। वहीं इधर केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला है, साथ ही भाजपा को चुनाव कराने की चुनौती दी है।
सूत्रों ने कहा कि संघीय एजेंसी ने कई ऐसे बिंदुओं को उठाया है जिन्हें विशेष अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के स्तर पर नजरअंदाज किया गया और उन पर विचार नहीं किया गया।एजेंसी के एक प्रवक्ता ने इससे पहले दिन में कहा था, ‘‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में तत्काल अपील करने का फैसला किया है, क्योंकि जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज किया गया है या उन पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया है।’’ विशेष अदालत ने शुक्रवार को केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को शराब नीति मामले में सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए आरोपमुक्त कर दिया। इस मामले में जिन 21 लोगों को क्लीन चिट दी गई है, उनमें तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं।
वहीं इधर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने शराब नीति संबंधी एक ‘‘फर्जी’’ मामले के माध्यम से आम आदमी पार्टी (आप) को खत्म करने की साजिश रची।मामले में ‘क्लीन चिट’ मिलने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख ने कहा कि वे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज किए गए मामलों के संबंध में आरोप मुक्त करने के लिए अदालत में आवेदन दाखिल करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने प्रदूषण, प्रदूषित यमुना, खराब सड़कों जैसी समस्याओं से दिल्ली में अराजकता फैला दी है... मैं प्रधानमंत्री मोदी को दिल्ली में नए सिरे से चुनाव कराने की चुनौती देता हूं और अगर भाजपा 10 से अधिक सीट जीतती है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।’’ भाजपा पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में केवल ईमानदारी और प्रतिष्ठा अर्जित की है, जिस पर मोदी और शाह ने एक ‘‘फर्जी’’ शराब घोटाला मामले के जरिए हमला किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है और मौजूदा परिस्थितियों में जब सभी संस्थाएं हमले के घेरे में हैं, न्यायाधीश ने आदेश पारित करने में जबरदस्त साहस दिखाया है।