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'BuDo for Life', जीवन और नेतृत्व के 10 मंत्रों से सजे Sensei Eyal Nir के नए सफर की शुरुआत

हर्षवर्धन नेवतिया ने किया पुस्तक का विमोचन, अनुशासन, आत्म-जागरूकता और नेतृत्व पर हुई विशेष चर्चा

कोलकाता : तेजी से बदलती दुनिया में मानसिक संतुलन, उद्देश्यपूर्ण जीवन और आत्म-जागरूकता की बढ़ती जरूरत के बीच अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मार्शल आर्ट विशेषज्ञ और लीडरशिप मेंटर सेंसेई इयाल नीर (Sensei Eyal Nir) की नई पुस्तक 'BuDo for Life' का भव्य विमोचन कोलकाता के द कॉन्क्लेव (The Conclave) में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण अंबुजा नेवतिया समूह के चेयरमैन हर्षवर्धन नेवतिया ने किया।

'BuDo for Life' पारंपरिक जापानी दर्शन 'बुडो' (BuDo) पर आधारित है, जिसे केवल मार्शल आर्ट तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में अपनाने योग्य सिद्धांतों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बुडो की सदियों पुरानी सीख को 10 व्यावहारिक और प्रभावी टूल्स के रूप में समझाया गया है, जिनकी मदद से व्यक्ति अनुशासन, आत्मविश्वास, लचीलापन, ईमानदारी, आत्म-जागरूकता और मानसिक संतुलन जैसे गुण विकसित कर सकता है।

विमोचन समारोह में हर्षवर्धन नेवतिया ने कहा कि सेंसेई इयाल नीर का दृष्टिकोण इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने मार्शल आर्ट के सिद्धांतों को नेतृत्व, सीखने और रोजमर्रा की जिंदगी में सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने कहा कि "सच्ची ताकत आत्म-अनुशासन और आत्म-नियंत्रण में होती है। आज जब दुनिया केवल तेज गति और परिणामों पर ध्यान देती है, यह पुस्तक उद्देश्यपूर्ण और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।"

पुस्तक के लेखक सेंसेई इयाल नीर ने कहा कि 'BuDo for Life' केवल प्रेरक पुस्तक नहीं है, बल्कि बुडो के सदियों पुराने ज्ञान से विकसित एक नई प्रणाली है। उन्होंने कहा कि इसमें दिए गए 10 व्यावहारिक सिद्धांत पाठकों को दीर्घकालिक सफलता और बेहतर जीवन की दिशा में मार्गदर्शन देंगे।

पुस्तक विमोचन के बाद लेखक के साथ एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें नेतृत्व, अनुशासन, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, आजीवन सीखने की प्रक्रिया और मजबूत चरित्र निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को सेंसेई इयाल नीर से मुलाकात और पुस्तक पर उनके हस्ताक्षर लेने का भी अवसर मिला।

इस अवसर पर जापान के कोलकाता स्थित उप महावाणिज्यदूत अशिदा कात्सुनोरी, ऑल इंडिया बुडो शोतोकान कराटे एसोसिएशन (AIBSKA) के संस्थापक एवं चेयरमैन तीर्थंकर नंदी सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम ने बुडो की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक जीवन में उसकी प्रासंगिकता को नए सिरे से रेखांकित किया।

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