टॉप न्यूज़

हर वार का मिलेगा 20 गुना जवाब : Trump

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिकी कार्रवाई तेज, IRGC मुख्यालय और कई रणनीतिक ठिकाने बने निशाना

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर कथित हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह अब तक का सबसे कड़ा जवाब है और अगर ईरान ने दोबारा हमला किया तो अमेरिका 20 गुना ज्यादा ताकत से जवाब देगा।

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी हमलों में जास्क, सीरिक, बंदर अब्बास, अबू मूसा द्वीप, चाबहार पोर्ट का मैरिटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर, बुशहर, उत्तरी ईरान के अकाला क्षेत्र का रेलवे ब्रिज और बलूचिस्तान प्रांत का ईरानशहर प्रमुख निशाने पर रहे। बताया जा रहा है कि पहली बार उत्तरी ईरान के रेलवे नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है।

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के दो रेलवे पुलों पर भी बमबारी की। इन हमलों से गोलेस्तान प्रांत में तुर्कमेनिस्तान सीमा के पास स्थित रेलवे नेटवर्क को नुकसान पहुंचने की खबर है।

अमेरिकी कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सलमान कमांड मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा चाबहार, कोनारक, बंदर अब्बास, जास्क, सीरिक और क़ेश्म जैसे कई रणनीतिक इलाकों पर भी हमले किए गए।

नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों का करारा जवाब दिया है। उनका दावा था कि ईरान ने दो नहीं बल्कि तीन जहाजों को निशाना बनाया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने फिर हमला किया तो अमेरिका पहले से कई गुना अधिक ताकत के साथ जवाब देगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान बातचीत करना चाहता है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तेहरान किसी भी समझौते का पालन करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य केवल ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है और इसी लक्ष्य के तहत सैन्य अभियान चलाया जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन से जुड़ी सुरक्षा अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि तुर्किए से लौटते समय विमान बदलने का फैसला किसी सुरक्षा खतरे की वजह से नहीं, बल्कि परिचालन कारणों से लिया गया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह हमेशा ईरान के निशाने पर रहते हैं।

SCROLL FOR NEXT