पीड़ित को अस्पताल पहुंचाया गया  REP
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SIR के काम के दबाव से हाबरा में BLO बेहोश !

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : पश्चिम बंगाल में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्य के अत्यधिक दबाव के कारण बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर संकट गहराता जा रहा है। कृष्णानगर में BLO रिंकू तरफदार की आत्महत्या की हृदयविदारक घटना के बाद, अब उत्तर 24 परगना जिले के हाबड़ा में एक और BLO, सुमन दास, काम के बोझ से बीमार होकर अस्पताल पहुँच गए हैं। इस घटना ने जिले की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से सियासी तूफान ला दिया है।

गायघाटा विधानसभा क्षेत्र के मछलंदपुर निवासी सुमन दास को गंभीर हालत में हाबड़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके परिवार ने बताया कि सुमन दास पिछले कई दिनों से एसआईआर के लिए फॉर्म एंट्री करने के अत्यधिक दबाव में थे। उनके भाई अयान दास ने मीडिया को जानकारी दी कि उनका भाई देर रात तक काम करता था, लेकिन सर्वर डाउन होने की समस्या के कारण उनका तनाव कई गुना बढ़ गया था। सोमवार की सुबह जब वह अस्वस्थ महसूस कर रहे थे, तो परिजनों ने उन्हें आराम करने दिया। हालांकि, कुछ देर बाद एक रिश्तेदार ने उन्हें घर में बेहोशी की हालत में पाया, जिसके बाद उन्हें तुरंत हाबड़ा अस्पताल ले जाया गया।

राजनीतिक बयानबाजी का दौर हुआ शुरू

इस घटना के सामने आते ही, जिले की राजनीति गरमा गई। बीमार BLO से मिलने अस्पताल पहुंचे गायघाटा के भाजपा विधायक सुब्रत ठाकुर ने इस घटना को एसआईआर के दबाव का परिणाम मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने टीएमसी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सुमन दास एसआईआर के कारण नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राजनीतिक दबाव में बीमार पड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह पहले से बीमार थे, तो इसकी सूचना चुनाव आयोग को दी जानी चाहिए थी।

वहीं, हाबड़ा के विधायक ज्योतिप्रिय मल्लिक और हाबड़ा पुरसभा के चेयरमैन नारायण साहा ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा झूठ की राजनीति कर रही है और BLO के लगातार बीमार पड़ने का कारण चुनाव आयोग द्वारा थोपा गया अत्यधिक और अमानवीय कार्यभार है।

गौरतलब है कि यह अकेली घटना नहीं है। इससे पहले, कोन्नगर की BLO तपति विश्वास भी एसआईआर फॉर्म वितरण के दौरान चक्कर खाकर गिर गई थीं। डॉक्टरों ने उन्हें सेरेब्रल अटैक होना बताया था और उनका इलाज कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। BLOs पर बढ़ते दबाव और लगातार हो रही स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों ने चुनाव आयोग की कार्यशैली और एसआईआर प्रक्रिया के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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