नई दिल्ली: राज्यसभा में भाजपा की ताकत और बढ़ने वाली है। 24 जुलाई को पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के बाद भाजपा के खाते में तीन नई सीटें जुड़ने की संभावना है। ये सीटें तृणमूल कांग्रेस के उन पूर्व सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
तीनों सीटों पर जीत मिलने के बाद भाजपा राज्यसभा में साधारण बहुमत (123 सीट) से सिर्फ छह सीट दूर रह जाएगी। किसी एक दल को राज्यसभा में आखिरी बार पूर्ण बहुमत 1986 में राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के समय मिला था।
हालांकि भाजपा अपने दम पर बहुमत से अभी भी पीछे रहेगी, लेकिन एनडीए के पास राज्यसभा में करीब 152 सांसदों का समर्थन होने से उसकी स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत मानी जा रही है।
आगामी संसद के मॉनसून सत्र से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि सरकार परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण जैसे अहम संवैधानिक विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है।
संवैधानिक संशोधन पारित कराने के लिए राज्यसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। पूर्ण संख्या के आधार पर यह आंकड़ा 166 वोट का बनता है।
एनडीए अभी दो-तिहाई बहुमत से पीछे है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ क्षेत्रीय दल सरकार का समर्थन कर सकते हैं या मतदान से दूरी बना सकते हैं। इनमें DMK, YSR कांग्रेस, बीजू जनता दल (BJD), NCP (SP) के एक सांसद और निर्दलीय सांसद परिमल नाथवानी के संभावित रुख पर नजर रहेगी।
ऐसे में पश्चिम बंगाल की तीन सीटों का उपचुनाव सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी संसद सत्र के अहम विधेयकों के लिए भी राज्यसभा का पूरा गणित बदल सकता है।