सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे श्री विजयपुरम स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के अंडमान एवं निकोबार क्षेत्रीय केंद्र के दौरे के दौरान द्वीपों की जैव विविधता के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाल रहे थे। वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह “जैव विविधता की जीवंत प्रयोगशाला” हैं, जहां आधुनिक विज्ञान को संरक्षण और सतत आजीविका के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेडएसआई जैसे संस्थान प्रामाणिक वैज्ञानिक आंकड़े तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूलन और महासागर आधारित आर्थिक विकास से जुड़ी राष्ट्रीय नीतियों का मार्गदर्शन करते हैं। इस अवसर पर डॉ. सी. शिवापेरुमन, साइंटिस्ट-एफ एवं प्रभारी अधिकारी ने मंत्री का स्वागत किया और क्षेत्रीय केंद्र के दायित्वों, चल रहे अनुसंधान कार्यक्रमों तथा द्वीपों की विशिष्ट जीव-जंतुओं की पहचान, संरक्षण और निगरानी में योगदान की जानकारी दी। प्रस्तुति में टैक्सोनॉमी, आणविक प्रणालीविज्ञान, डीएनए बारकोडिंग, जैव विविधता आकलन और क्षमता निर्माण में जेडएसआई के कार्यों को रेखांकित किया गया।
1977 में स्थापित यह केंद्र लगभग 50 वर्षों से निरंतर वैज्ञानिक सेवाएं प्रदान कर रहा है और उष्णकटिबंधीय द्वीप जैव विविधता अनुसंधान का प्रमुख संस्थान बन चुका है। केंद्र द्वारा अब तक 90 से अधिक अनुसंधान कार्यक्रम पूरे किए गए हैं और 85 पुस्तकें तथा 850 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने जेडएसआई संग्रहालय का भी भ्रमण किया, जहां 22 जीव समूहों के लगभग 3,500 नमूने प्रदर्शित हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा नारकोंडम ट्री श्रू सहित 20 से अधिक नई प्रजातियों की पहचान की गई है और लगभग 900 नए जीव अभिलेख दर्ज किए गए हैं, जो क्षेत्र की वैश्विक जैव विविधता महत्ता को दर्शाता है।