नयी दिल्ली, दिल्ली ब्यूरो। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी को इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (ICA) के ग्लोबल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में At-Large Director चुना गया है। 15 सितंबर को पनामा सिटी में हुई ICA की जनरल असेंबली के दौरान ग्लोबल बोर्ड के लिए चुनाव हुआ, जिसमें संघाणी को 526 वोट मिले। वह 15 At-Large Director पदों के लिए हुए चुनाव में तीसरे सबसे अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवार रहे। उनका कार्यकाल 2026 से 2030 तक रहेगा।
संघाणी इस चुनाव में भारत की ओर से एकमात्र उम्मीदवार थे। अलग-अलग देशों के 24 उम्मीदवारों के बीच 15 At-Large Director पदों के लिए चुनाव हुआ। संघाणी के निर्वाचन के साथ ICA के ग्लोबल बोर्ड में भारत को सीधे प्रतिनिधित्व मिला है। ICA का ग्लोबल बोर्ड कुल 30 सदस्यों का है। इसमें अध्यक्ष, चार क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, आठ सेक्टोरल संगठनों के प्रतिनिधि, युवा और जेंडर इक्वेलिटी कमेटी के अध्यक्ष तथा 15 At-Large Directors शामिल होते हैं।
पनामा में हुई ICA जनरल असेंबली में कुल 66 देशों के 193 सदस्य संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 116 मतदाताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान अर्जेंटीना के एरियल ग्वारको को ICA अध्यक्ष के तौर पर निर्विरोध फिर चुना गया। नए ग्लोबल बोर्ड में 16 देशों के सहकारी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इनमें संघाणी के अलावा कनाडा, चीन, जापान, तुर्किये, पोलैंड, मलेशिया और फ्रांस के नए At-Large Directors भी शामिल हैं।
चार दशक से अधिक का सहकारिता क्षेत्र का अनुभव
दिलीप संघाणी पिछले चार दशक से अधिक समय से सहकारिता क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वह पेशे से प्रशिक्षित वकील हैं और गुजरात विधानसभा के सदस्य रहने के साथ लोकसभा के लिए चार बार चुने जा चुके हैं। वह गुजरात सरकार में सहकारिता मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में इफको के अध्यक्ष हैं।
इफको के अध्यक्ष के तौर पर संघाणी किसानों और सहकारी संस्थाओं से जुड़े बड़े नेटवर्क का नेतृत्व कर रहे हैं। ICA के अनुसार, इफको से करीब 35,700 प्राथमिक सहकारी समितियां जुड़ी हैं, जो 5 करोड़ से अधिक किसानों का प्रतिनिधित्व करती हैं। सहकारिता के जरिए किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय समुदायों को मजबूत करने पर उनका लगातार जोर रहा है।
भारत की सहकारिता को वैश्विक मंच पर नई भूमिका
संघाणी का निर्वाचन ऐसे समय हुआ है, जब भारत में सहकारिता क्षेत्र को कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। उनकी जीत को भारतीय सहकारिता आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ICA ग्लोबल बोर्ड में उनकी मौजूदगी से भारत के सहकारी क्षेत्र से जुड़े अनुभव और मुद्दों को संगठन के निर्णय लेने वाले मंच पर रखने का अवसर मिलेगा।
संघाणी की उम्मीदवारी के दौरान भारत में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े संगठनों और कई देशों के प्रतिनिधियों का समर्थन भी मिला। वर्ष 2024 में नई दिल्ली में आयोजित ICA ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस और जनरल असेंबली में भी संघाणी की अहम भूमिका रही थी। इसी दौरान नई दिल्ली में इंटरनेशनल ईयर ऑफ कोऑपरेटिव्स 2025 की शुरुआत से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
संघाणी ने अपनी जीत के बाद ICA के सदस्य देशों, प्रतिनिधियों और दुनिया भर के सहकारी समुदाय का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह भारत के सहकारिता आंदोलन के अनुभव और दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से रखने तथा दुनिया भर में सहकारिता को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
उनकी उम्मीदवारी और निर्वाचन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन से भी जोड़ा गया है। भारत में सहकारिता के माध्यम से किसानों, ग्रामीण समुदायों और आम नागरिकों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण पर जोर दिया जा रहा है। ICA में नई जिम्मेदारी के साथ संघाणी के सामने भारतीय सहकारिता के अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने और वैश्विक सहकारी आंदोलन से जुड़े मुद्दों में भारत की भागीदारी को आगे बढ़ाने की भूमिका होगी।