अंजलि भाटिया
आज यानी 12 फरवरी को देशभर में भारत बंद का आह्वान किया गया है। ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और कई सामाजिक संगठनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हड़ताल बुलाई है। इसका असर कई जगहों पर आम जनजीवन पर पड़ सकता है।
भारत बंद क्यों बुलाया गया है?
यूनियनों का कहना है कि सरकार के नए लेबर सुधार और कुछ दूसरी नीतियां मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही हैं। उनका आरोप है कि नए लेबर कोड से—
नौकरी की सुरक्षा कम होगी
कर्मचारियों को निकालना आसान हो जाएगा
मजदूरों को पहले जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी
इसलिए यूनियनें सरकार पर दबाव बनाना चाहती हैं।
कौन-कौन कर रहा है बंद का समर्थन?
यह बंद 10 बड़ी ट्रेड यूनियनों ने मिलकर बुलाया है, जैसे—
AITUC
INTUC
CITU
HMS
SEWA आदि
इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और कई किसान व छात्र संगठन भी समर्थन कर रहे हैं।
कितने लोग शामिल हो सकते हैं?
यूनियनों का दावा है कि इस बार करीब 30 करोड़ मजदूर हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। बंद का असर 600 से ज्यादा जिलों में दिख सकता है।
क्या-क्या प्रभावित हो सकता है?
भारत बंद की वजह से इन सेवाओं पर असर पड़ सकता हैं।
सरकारी बैंक और बीमा कार्यालय
सरकारी दफ्तर
राज्य परिवहन की बस सेवाएं (कुछ राज्यों में)
कुछ फैक्ट्रियां और औद्योगिक इकाइयां
कोयला और स्टील सेक्टर
कुछ जगहों पर दुकानें और बाजार
खासकर केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में असर ज्यादा हो सकता है।
क्या-क्या सेवाएं चालू रहेंगी?
कुछ जरूरी सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है, जैसे—
अस्पताल और इमरजेंसी सेवाएं
एंबुलेंस
मेट्रो सेवा
ट्रेनें
प्राइवेट ऑफिस और IT कंपनियां
स्कूल और कॉलेज
यूनियनों की मुख्य मांगें क्या हैं?
यूनियनें चाहती हैं कि—
नए लेबर कोड वापस लिए जाएं
मनरेगा को मजबूत किया जाए
पुरानी पेंशन योजना लागू हो
नई शिक्षा नीति पर दोबारा विचार हो
किसानों को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियां रोकी जाएं
सरकार ने क्या तैयारी की है?
सरकार और प्रशासन ने कहा है कि जरूरी सेवाएं बंद से प्रभावित नहीं होंगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल भी तैनात किए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।