नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवारों के लिए एनसीपीआई नेताओं के प्रचार के फैसले ने तृणमूल से अलग हुए 20 सांसदों की रणनीति को लेकर नई अटकलें तेज कर दी हैं।
एनसीपीआई अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चट्टोपाध्याय के मुताबिक, पार्टी एनडीए की सहयोगी है और दोनों सीटों पर उसके उम्मीदवार नहीं हैं। इसलिए गठबंधन धर्म के तहत एनसीपीआई नेता भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करेंगे। दिलचस्प यह है कि भाजपा के लिए चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी के बीच यही 20 सांसद लोकसभा सदस्यता से जुड़े मामले में जवाब देने के लिए लगातार समय मांग रहे हैं।
लोकसभा अध्यक्ष की नोटिस पर पहले अतिरिक्त समय मांगने के बाद अब उन्होंने चार सप्ताह और यानी 20 अक्टूबर तक की मोहलत मांगी है। यहीं से राजनीतिक सवाल उठ रहा है—क्या उपचुनाव में भाजपा के पक्ष में सक्रिय भूमिका और जवाब के लिए मांगी गई समय-सीमा के बीच कोई रणनीतिक संबंध है?
आधिकारिक तौर पर सांसदों ने अतिरिक्त समय की वजह जवाब तैयार करने की जरूरत बताई है लेकिन 6 अक्टूबर के मतदान के बाद 20 अक्टूबर तक की मांगी गई मोहलत ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दी है। तृणमूल नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सांसदों के बार-बार समय मांगने पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि ये सांसद लगातार समय मांग रहे हैं और जवाब देने में देरी कर रहे हैं। शोभनदेव ने 20 सांसदों को “लोकसभा की शर्म” करार देते हुए कहा कि वह मामले के कानूनी पहलू पर टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन राजनीतिक रूप से उनका आचरण सवालों के घेरे में है।