अपने काम में लगा बहूबाजार का स्वर्ण कारीगर  
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संकट में बंगाल का स्वर्ण शिल्प, आसमान छूती कीमतों से 10 लाख कारीगर सीधे प्रभावित !

बहूबाजार से मिदनापुर तक पसरा सन्नाटा, पुश्तैनी हुनर छोड़ मजदूरी करने को मजबूर कलाकार

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बंगाल की विश्वप्रसिद्ध सूक्ष्म स्वर्ण कारीगरी आज एक अभूतपूर्व आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। सोने और चांदी की आसमान छूती कीमतों ने न केवल बाजार की चमक फीकी कर दी है, बल्कि सीधे तौर पर कोलकाता महानगर के साथ ही राज्यभर के लगभग 10 लाख आभूषण कारीगरों और हजारों छोटे स्वर्ण व्यवसायियों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। कोलकाता के प्रसिद्ध स्वर्ण केंद्र बहूबाजार के व्यवसायी पिंटू साव और सौम्यजीत का कहना है कि धनतेरस के बाद बाजार में सुधार की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि नए गहनों के ऑर्डर लगभग न के बराबर हैं। पिंटू साव के अनुसार, 'जब हमारे पास काम ही नहीं आ रहा, तो हम कारीगरों को मजदूरी कहां से देंगे? पिछले कुछ महीनों से हम उन्हें नया काम देने में असमर्थ हैं।'

हुनरमंदों का पलायन, मजदूरी करने को मजबूर हो रहे हैं कलाकार

स्वर्ण कारीगरी बंगाल की पहचान है, जिसे कारीगरों ने पीढ़ियों से संजोया है। लेकिन आज भुखमरी की स्थिति ने उन्हें यह काम छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। कारीगर राजीव सारा और संजय पटवा ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि यह काम उन्होंने अपने बाप-दादा के जमाने से सीखा है। राजीव राय कहते हैं, 'अब इस काम से जुड़े रहना बहुत कठिन है, कई साथियों ने पहले ही काम बदल दिया है और पेट पालने के लिए मजदूरी कर रहे हैं।' वहीं कई कारीगर जो कि अन्य राज्यों में काम करने गये थे वे भी काम नहीं होने के कारण वापस आ रहे हैं। वहीं मिदनापुर से आए व्यवसायी व कारीगर प्रणव कामिला इस संकट का एक और पहलू उजागर करते हैं। उन्होंने बताया कि ग्राहकों को बचाने के लिए उन्हें सीधे तौर पर 25 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि जब ऑर्डर लिया था तब रेट कम थे और आज सोन की कीमत में भारी अंतर आ चुका है।

काम की कमी ने बढ़ा दी है चिंता, ऐसी ही थी इस स्वर्ण कारीगर की प्रतिक्रिया

बंगीय स्वर्ण कारीगर व व्यवसायी समिति ने जतायी गहरी चिंता

बंगीय स्वर्ण कारीगर व व्यवसायी समिति के राज्य सचिव बलाई राय, गोपाल दास ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो यह कला समाप्त हो जाएगी, क्योंकि भविष्य असुरक्षित देख नई पीढ़ी इसे सीखने को तैयार नहीं है।

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