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बंगाल : तृणमूल शासन में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई : ममता बनर्जी

सीएम ने कहा कि तृणमूल शासन में पश्चिम बंगाल में मछली उत्पादन 1.72 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 23.74 लाख मीट्रिक टन हो गया है, उन्होंने प्रधानमंत्री के दावे का खंडन किया

sabita

सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : मत्स्य पालन में पश्चिम बंगाल के पिछड़ जाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दावे का खंडन करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ममता बनर्जी उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मोदी बाबू ने कहा कि बिहार में बंगाल की तुलना में अधिक मछली का उत्पादन होता है और इसे अन्य राज्यों में बेचा जाता है। ऐसा होना ही है, क्योंकि बिहार में लोगों को मछली खाने की अनुमति नहीं है।’’ इससे पहले, मोदी ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल में एक चुनावी रैली में कहा था कि तृणमूल सरकार राज्य में मछली की उच्च मांग के अनुरूप उत्पादन करने में विफल रही है। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को ममता के इस दावे की हवा निकालने की कोशिश के रूप में देखा गया था कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बंगाल में विधानसभा चुनाव जीतती है, तो वह राज्य में मछली खाने पर प्रतिबंध लगा देगी।

ममता ने कहा कि तृणमूल शासन में पश्चिम बंगाल में मछली उत्पादन 1.72 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 23.74 लाख मीट्रिक टन हो गया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य मछली उत्पादन में अग्रणी है। ममता ने कहा, ‘‘खारे पानी में मछली उत्पादन 1.98 लाख मीट्रिक टन है।’’ उन्होंने दावा किया कि मछुआरों की आय में भी वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार के कार्यकाल में अन्य राज्यों से मछली का आयात 1.12 लाख मीट्रिक टन से घटकर 1.02 लाख मीट्रिक टन हो गया है।’’ मोदी ने कहा था कि बंगाल में मछली की मांग अधिक है और वह इसे अन्य राज्यों से आयात करता है।

बंगाल अन्य राज्यों को भी मछली निर्यात करता है

शुक्रवार को चुनावी रैली में ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल अन्य राज्यों को भी मछली निर्यात करता है।अन्य राज्यों को मछली का निर्यात आयात से 76,000 टन अधिक रहा। ममता ने कहा, ‘‘अन्य देशों को मछली का निर्यात 1.45 लाख मीट्रिक टन रहा।’’ उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अंडे की 90 प्रतिशत आवश्यकता राज्य के भीतर ही पूरी हो जाती है।

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