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बंगाल चुनाव : बिक जाते हैं राजनीतिक पार्टियों के करोड़ों झंडे

झंडे, बैज और टी-शर्ट से गुलजार हुए बाजार

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। जहां एक ओर सत्ता की लड़ाई में तृणमूल और बीजेपी आमने-सामने हैं, वहीं दूसरी ओर बाजारों में भी चुनावी सामग्रियों को लेकर मुकाबला दिख रहा है। बाजार पर भी चुनावी रंग दिखाई देने लगा है। यहां तक राजनीतिक पार्टियों के करोड़ों झंडे बिक जाते हैं। इस बार भी यही उम्मीद है कि यह आंकड़ा पार हो सकता है। कोलकाता के प्रसिद्ध बड़ाबाजार क्षेत्र में इन दिनों राजनीतिक पार्टियों के झंडे, टोपी, बैज और टी-शर्ट सहित अन्य सामग्रियों की कई दुकानें सज गयी हैं। चुनाव केवल राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापारियों के लिए भी एक बड़ा अवसर बनकर उभरता है, हालांकि व्यापारियों के अनुसार अभी बाजार पूरी तरह चरम पर नहीं पहुंचा है, लेकिन जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, चुनावी सामग्रियों की मांग में तेजी से उछाल आने की संभावना है।

बंगाल पॉलिटिक्स में छतरी की हाई डिमांड

चुनावी सामग्रियों के इस कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जितनी कड़ी होगी बिक्री भी उतनी अधिक होगी। चुनाव भी व्यापारियों के लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभरता है। दुकानदार राहुल गंभीर ने बताया कि वह सालों से चुनावी सामग्रियों का कारोबार करते आ रहे हैं। एक-एक चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के करोड़ों झंडे बिक चुके हैं। हमारे पास तृणमूल, भाजपा, माकपा, कांग्रेस सभी पार्टियों के प्रचार के सामान हैं। इस बार गर्मी के कारण पार्टी सिंबल वाले छाता की काफी मांग है। इससे गर्मी से राहत और प्रचार दोनों का काम होता है।

चुनावी सामग्रियों में भी तृणमूल और भाजपा का जोरदार मुकाबला

मुकाबला केवल राजनीतिक मैदान में ही नहीं बल्कि प्रचार के सामानों को लेकर भी साफ दिख रहा है। तृणमूल के जोड़ा फूल की प्रिंट वाली साड़ियां एक तरफ बिक रही हैं तो दूसरी ओर कमल फूल की छाप वाली साड़ी भी इस मुकाबले में पीछे नहीं है। वहीं माकपा की हंसुआ हथौड़ा चिह्न वाली टी शर्ट भी बाजार में उपलब्ध है।

बड़े कारोबार की मुख्य बातें

* तृणमूल और भाजपा जैसी बंगाल में अहम दो राजनीतिक पार्टियां भारी संख्या में प्रचार सामग्रियों का ऑर्डर देती हैं।

*गांव-गांव और शहरों की गली मुहल्ले तक कार्यकर्ताओं तक सामग्री पहुंचाई जाती है।

*गौर करेंगे तो जहां पार्टियों के झंडे पटे होते हैं वहां राजनीतिक मुकाबला भी दिलचस्प समझा जाता है।

* चुनाव का “इकोनॉमी साइज” बहुत बड़ा होता है और प्रचार सामग्री का बाजार ही बूम पर होता है।

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