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बंगाल : कैग ने ’स्वास्थ्य साथी’ योजना के क्रियान्वयन में कई खामियों का खुलासा किया

कोलकाता : भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने गत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ के क्रियान्वयन में कई खामियों की ओर संकेत किया है। इनमें सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को अधिक भुगतान, लाभार्थियों के पंजीकरण में अनियमितताएं, शिकायत निवारण व्यवस्था की कमजोरी तथा बीमा कंपनियों के खिलाफ अनुबंध संबंधी प्रावधानों को लागू नहीं करना शामिल है। ये टिप्पणियां मार्च 2023 को समाप्त वर्ष के लिए कैग की प्रदर्शन एवं अनुपालन लेखा परीक्षा रिपोर्ट में की गई हैं, जिसे शनिवार को विधानसभा में पेश किया गया। प्रदर्शन लेखा परीक्षा में वर्ष 2018-19 से 2022-23 के दौरान योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

लेखा परीक्षा में पाया गया कि जुलाई 2024 तक राज्य नोडल एजेंसी (एसएनए) ने योजना के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए न तो व्यापक दिशा-निर्देश तैयार किए थे और न ही वार्षिक कार्ययोजनाएं बनाई थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च 2023 तक योजना के तहत पंजीकृत परिवारों की संख्या, अगस्त 2023 के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में राशन कार्डधारक परिवारों की संख्या से लगभग 10 प्रतिशत अधिक थी। इससे यह आशंका पैदा होती है कि योजना का लाभ अपात्र लाभार्थियों तक भी पहुंचा हो सकता है। कैग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अक्टूबर 2021 में शुरू किया गया आधार से जोड़ने का अभियान अब तक पूरा नहीं हो सका, जिससे सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हुई और एक ही व्यक्ति के एक से अधिक बार पंजीकरण का जोखिम बढ़ गया।

लेखा परीक्षा के अनुसार, जांच के लिए चुने गए 50 सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में से 31 को उनके बुनियादी ढांचे, उपलब्ध सेवाओं और स्वीकृत बिस्तरों की संख्या की तुलना में अधिक ग्रेड प्रदान किया गया था। इसके परिणामस्वरूप इन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को निर्धारित पात्रता से अधिक पैकेज दरों का लाभ मिला, जिससे 14.48 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि 2.43 करोड़ लाभार्थी परिवारों को सेवाएं देने के लिए 3,038 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (एचसीपी) को सूचीबद्ध किया जाना था, लेकिन केवल 2,605 एचसीपी को ही सूचीबद्ध किया गया। इससे लाभार्थियों के लिए अस्पतालों के चयन के विकल्प सीमित हुए और सेवा वितरण प्रभावित हुआ।

कैग ने पाया कि अप्रैल 2018 से जुलाई 2022 के बीच पांच बीमा कंपनियों ने 7.26 करोड़ रुपये के 3,955 दावों का भुगतान नहीं किया और इसके कारणों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।रिपोर्ट के अनुसार, अनुबंध में प्रावधान होने के बावजूद एसएनए ने दावों के निपटान में देरी के लिए तीन बीमा कंपनियों से 31.33 करोड़ रुपये का जुर्माना भी नहीं वसूला। कैग ने यह भी कहा कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने अपने समझौतों के तहत निर्धारित दावा अनुपात हासिल नहीं करने के बावजूद राज्य नोडल एजेंसी को 29.78 करोड़ रुपये वापस नहीं किए।

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