बेलघरिया (उत्तर 24 परगना): एक तरफ जहाँ देश "डिजिटल इंडिया" और आधुनिकता की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहीं उत्तर 24 परगना के बेलघरिया इलाके से आई एक तस्वीर प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इलाके में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत और वितरण व्यवस्था में आई तकनीकी बाधाओं के कारण कई परिवार अब आदिम युग की तरह ईंट और मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासी मधुसूदन का परिवार पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर के लिए भटक रहा है। मधुसूदन ने बताया कि वे पिछले 35 दिनों से गैस का पंजीकरण (Booking) कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया सफल नहीं हो पा रही है। थक-हारकर उन्होंने अपने निर्माणाधीन दोमंजिला मकान के पास ईंटों का अस्थायी चूल्हा बनाया है, जहाँ अब लकड़ियों और बांस के सहारे भोजन पकाया जा रहा है।
यह समस्या केवल एक घर तक सीमित नहीं है, बल्कि बेलघरिया के कई इलाकों में ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। गैस न मिलने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है। भीषण गर्मी और चूल्हे के कड़वे धुएं के बीच खाना बनाना उनकी सेहत और दैनिक जीवन के लिए चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वितरण केंद्रों पर बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल रहा है। निवासियों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप करे और गैस आपूर्ति व पंजीकरण प्रक्रिया को सुचारु बनाए ताकि आम जनता को इस किल्लत से निजात मिल सके।