मां से दोबारा मिलाया गया बेटे को  
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बैरकपुर पुलिस की मानवीय पहल: अपनों से बिछड़ी दो महिलाओं को ढूंढकर उनके परिवारों को सौंपा

नि​धि, सन्मार्ग संवाददाता

बैरकपुर : बैरकपुर पुलिस ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदना की एक मिसाल पेश की है। ठंड की ठिठुरन और भीड़भाड़ के बीच अपनों से बिछड़े लोगों के लिए पुलिस फरिश्ता बनकर सामने आई। दो अलग-अलग मामलों में पुलिस ने न केवल बेसहारा महिलाओं की जान बचाई, बल्कि तकनीकी जांच और त्वरित संचार के जरिए उन्हें उनके परिवारों से भी मिलाया।

पहली घटना: बामनगाछी में घायल वृद्ध महिला का सफल रेस्क्यू

पहली घटना 15 जनवरी की सुबह बैरकपुर थाना अंतर्गत मनीरामपुर इलाके की है। यहाँ सड़क के किनारे एक वृद्ध महिला को बेहद दयनीय स्थिति में पड़ा हुआ देखा गया। कड़ाके की ठंड और कुत्तों के काटने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति काफी गंभीर थी। बैरकपुर थाने के सब-इंस्पेक्टर (SI) जसीमुद्दीन सरकार ने सूचना मिलते ही मौके पर पहुँचकर महिला को रेस्क्यू किया और तुरंत बीएन बोस अस्पताल में भर्ती कराया।

अस्पताल में इलाज मिलने के बाद जब महिला को होश आया, तो उन्होंने अपना पता पूर्व मेदिनीपुर के रामनगर थाना क्षेत्र में बताया। बैरकपुर पुलिस ने तुरंत रामनगर थाने से संपर्क किया, जहाँ से पता चला कि उनके बेटे कालाचांद दास ने कुछ दिन पहले ही अपनी मां की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। सूचना मिलते ही कालाचांद बैरकपुर पहुँचे और उचित सत्यापन के बाद पुलिस ने उनकी मां को सकुशल उन्हें सौंप दिया।

परिवार के पास पहुंची मीना देवी

दूसरी घटना: गंगासागर मेले में अपनों से बिछड़ी बिहार की महिला का मिलन

दूसरी घटना न्यू बैरकपुर थाना क्षेत्र की है। यहाँ पुलिस को एक महिला, जिनका नाम मीना देवी था, सड़क पर भटकती हुई मिलीं। पुलिस उन्हें सुरक्षा के लिए थाने ले आई। पूछताछ के दौरान मीना देवी ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गंगासागर स्नान के लिए जा रही थीं, लेकिन भीड़भाड़ के कारण वह अपने परिजनों से बिछड़ गईं और भटकते हुए न्यू बैरकपुर पहुँच गईं।

जांच में पता चला कि वह बिहार के शेखपुरा जिले के कोरमा थाना अंतर्गत अबगिल गांव की निवासी हैं। पुलिस ने तुरंत उनके परिवार से संपर्क किया। शुक्रवार सुबह आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों के सत्यापन के बाद, मीना देवी को उनके पति जनार्दन सिंह को सौंप दिया गया। अपने परिवार को वापस पाकर महिला की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने और उनके पति ने बंगाल पुलिस की संवेदनशीलता के लिए आभार व्यक्त किया।

इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर साबित किया है कि पुलिस न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखती है, बल्कि संकट के समय एक रक्षक की भूमिका भी निभाती है।

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