कोलकाता : पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को नवान्न से ऐलान किया कि जुलाई 2026 से राज्य में आयुष्मान भारत योजना लागू कर दी जाएगी। इसके तहत राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना से जुड़े करीब 6 करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान भारत से जोड़ा जाएगा, ताकि वे देशभर में कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकें।
स्वास्थ्य क्षेत्र में “युगांतकारी परिवर्तन”
नवान्न में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई लंबी वर्चुअल बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य क्षेत्र में “युगांतकारी परिवर्तन” लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी के कारण लाखों लोग केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए थे, लेकिन अब नयी सरकार एक स्पष्ट रोडमैप के साथ आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आयुष्मान भारत के लिए एनरोलमेंट प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जुलाई से कार्ड वितरण भी शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही, जो लोग अब तक स्वास्थ्य साथी या आयुष्मान भारत से नहीं जुड़े थे, वे भी आवेदन कर सकेंगे।
आयुष्मान भारत के लिए 976 करोड़ रुपये मंजूर
जून के पहले सप्ताह में दिल्ली में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता होगा, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री एवं अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसका लाभ राज्य के उन लगभग एक करोड़ लोगों को भी मिलेगा, जो रोजगार या पढ़ाई के कारण दूसरे राज्यों में रह रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को इस वित्तीय वर्ष में लगभग 3,079 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 2,103 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत योजना के लिए 976 करोड़ रुपये शामिल हैं। पहली किस्त के रूप में लगभग 500 करोड़ रुपये राज्य के खाते में ट्रांसफर भी कर दिए गए हैं।
बंगाल में खुलेंगे 474 जनऔषधि केंद्र
सीएम ने बताया कि महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य में सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण अभियान भी शुरू किया जाएगा। 30 मई को विधाननगर सब डिविजनल हॉस्पिटल में मुख्यमंत्री स्वयं इसकी शुरुआत करेंगे। इसी दिन टीबी मुक्त भारत अभियान पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन भी होगा। सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों की संख्या 170 से बढ़ाकर 474 करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सामान्य लोगों के इलाज का खर्च काफी कम होगा और 2,000 रुपये की दवा लगभग 200 रुपये में मिल सकेगी।
हर जिले में स्थापित होगा मेडिकल कॉलेज
इसके अलावा, राज्य के हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी पहल तेज की जाएगी। अलीपुरदुआर, कलिम्पोंग, दक्षिण दिनाजपुर, आसनसोल और पश्चिम बर्दवान समेत कई क्षेत्रों में नए मेडिकल कॉलेजों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने उत्तर बंगाल में 'एम्स' जैसी अत्याधुनिक बहु-सुविधा वाले अस्पताल स्थापित करने का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को दिया है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था देश के अग्रणी मॉडलों में शामिल होगी।