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कोलकाता में ऑटो गैस की कीमतों में उछाल से यात्रियों पर बढ़ा किराए का बोझ

'काटा रूट' ने बढ़ाई मुसीबत

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: महानगर में परिवहन व्यवस्था एक बार फिर चरमरा गई है। सरकारी हो या निजी, कोलकाता में बसों की भारी किल्लत पहले से ही थी, अब आगामी विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा बसों के अधिग्रहण ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। ऐसे में शहरवासियों का एक बड़ा हिस्सा ऑटो पर निर्भर है, लेकिन ऑटो गैस (LPG) की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने आम आदमी की जेब ढीली कर दी है।

गैस के दाम में ₹12.28 की एकमुश्त वृद्धि

बुधवार को कोलकाता में ऑटो गैस की कीमत में प्रति लीटर 12.28 रुपये की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। मंगलवार तक जो गैस 70.68 रुपये प्रति लीटर थी, वह बुधवार सुबह से 82.96 रुपये हो गई है। पिछले एक महीने में किस्तों में गैस के दाम करीब 25 रुपये बढ़ चुके हैं। ऑटो चालकों का कहना है कि इस स्थिति में किराया 5 से 10 रुपये बढ़ाए बिना उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

इन रूटों पर बढ़ा किराया और 'काटा रूट' का आतंक

किराया बढ़ने की सबसे ज्यादा शिकायतें दमदम स्टेशन-नागेरबाजार, एयरपोर्ट 1 नंबर गेट-नागेरबाजार, उल्टाडांगा-शोभाबाजार, टॉलीगंज फाड़ी-ठाकुरपुकुर, गोलपार्क-गड़िया, टॉलीगंज-जादवपुर, पार्क सर्कस-धर्मतला और जोका-तारातला जैसे प्रमुख रूटों से आ रही हैं।

यात्रियों का आरोप है कि चालक न केवल किराया बढ़ा रहे हैं, बल्कि 'काटा रूट' (रूट को छोटे हिस्सों में बांटना) की समस्या भी गंभीर हो गई है। एक ही लंबे रूट को दो-तीन हिस्सों में बांटकर हर मोड़ पर अलग किराया वसूला जा रहा है, जिससे यात्रियों का मासिक बजट बिगड़ गया है।

यात्रियों का सवाल: क्या दाम घटने पर कम होगा किराया?

नित्य यात्रियों का सबसे बड़ा डर यह है कि एक बार किराया बढ़ जाने के बाद, भविष्य में गैस के दाम कम होने पर भी इसे घटाया नहीं जाता। पल्लवी यादव जैसी यात्रियों ने सवाल उठाया है, "क्या परिवहन विभाग का ऑटो यूनियनों पर कोई नियंत्रण नहीं है? बसों की कमी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूला जा रहा है।" दूसरी ओर, यूनियन नेताओं का कहना है कि गैस की आपूर्ति और कीमतें सामान्य होने तक किराया कम करना असंभव है।

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