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कांचरापाड़ा पालिका में 9 साल बाद हुआ ऑडिट !

केंद्रीय और राज्य फंड का रास्ता साफ, विकास कार्यों में आएगी तेजी

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कांचरापाड़ा : कांचरापाड़ा नगर पालिका के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। साल 2015 से लंबित पड़े ऑडिट रिपोर्ट के काम को वर्तमान बोर्ड ने युद्धस्तर पर पूरा कर लिया है। पिछले 9 वर्षों का बकाया ऑडिट 'एजी बंगाल' (AG Bengal) को सौंप दिया गया है, जिसकी जानकारी 'डायरेक्टर ऑफ लोकल बॉडीज' (DLB) को भी दे दी गई है। ऑडिट रिपोर्ट जमा होने के साथ ही नगर पालिका में 15वें वित्त आयोग सहित विभिन्न राज्य और केंद्रीय परियोजनाओं के फंड आने शुरू हो गए हैं।

फंड रुकने से बाधित था विकास

नगर पालिका सूत्रों के अनुसार, ऑडिट न होने के कारण 15वें वित्त आयोग, अमृत (AMRUT), 'पाथश्री' और 'आमादेर पाड़ा आमादेर समाधान' जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का पैसा अटका हुआ था। वर्तमान चेयरमैन कमल अधिकारी ने पदभार संभालते ही इस जटिलता को दूर करने का निर्देश दिया। ऑडिट रिपोर्ट से पता चला है कि वित्त वर्ष 2023-24 में नगर पालिका ने 32 करोड़ रुपये और 2024-25 में करीब 31 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

रेलवे की जमीन बनी बाधा, बकाया है 15 करोड़

कांचरापाड़ा एक प्रमुख 'बिजनेस हब' होने के बावजूद राजस्व के मामले में पिछड़ रहा है। नगर पालिका के 70 प्रतिशत क्षेत्र की जमीन रेलवे के अधीन है, जिसके कारण प्रॉपर्टी टैक्स से होने वाली आय सालाना मात्र 2.5 से 3 करोड़ रुपये ही है। चेयरमैन के अनुसार, रेलवे के पास सर्विस चार्ज के तौर पर नगर पालिका का लगभग 15 करोड़ रुपये बकाया है। जमीन रेलवे की होने के कारण बुनियादी ढांचा विकसित करने में नगर पालिका को कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्व और वर्तमान बोर्ड में खींचतान

लंबे समय तक ऑडिट न होने के पीछे पूर्व चेयरमैन सुदामा राय ने अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, वर्तमान चेयरमैन कमल अधिकारी ने विवाद में न पड़ते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि आय-व्यय का हिसाब पूरी तरह पारदर्शी रहे। ऑडिट पूरा होने से अब विकास कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं होगी। कई परियोजनाओं पर काम पहले ही शुरू हो चुका है।"

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