निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कमरहट्टी : कमरहट्टी नगरपालिका से पर्यावरण और प्रशासन की सतर्कता से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। अड़ियादह इलाके में एक विशाल जलाशय को पिछले कई वर्षों से अवैध रूप से भरने का खेल चल रहा था। जब इस भरी हुई जमीन पर एक नए हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए 'भूमि पूजन' शुरू किया गया, तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इसे रोक दिया।
आड़ियदह और दक्षिणेश्वर उत्तर उपनगरीय क्षेत्र के सबसे पुराने रिहाइशी इलाकों में से एक हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले 15 वर्षों में यहाँ कई ऐतिहासिक जलाशयों को रसूखदारों के इशारे पर खत्म कर दिया गया है। ताजा मामला केदारनाथ सिंह रोड के तेतुलतला मोड़ का है। बताया जा रहा है कि एक प्रभावशाली प्रमोटर समूह, जिसका दबदबा वाम मोर्चे के शासनकाल से ही बना हुआ है, इस विशाल जलाशय को धीरे-धीरे भर रहा था। वर्तमान में यह जलाशय लगभग पूरी तरह भर चुका है और केवल पाँच कट्ठा जमीन पर ही पानी बचा है।
बुधवार को जब इस विवादित जमीन पर निर्माण कार्य के लिए पूजा शुरू हुई, तो स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। इसकी सूचना वार्ड नंबर 8 के पार्षद और आड़ियदह-दक्षिणेश्वर शहर तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष दीपांशु घोषाल को दी गई। उन्होंने तुरंत मौके का मुआयना किया और पुलिस कमिश्नरेट के उच्च अधिकारियों (ACP) और बेलघरिया थाने को सूचित किया।
पुलिस बल ने मौके पर पहुँचकर चल रहे कार्यक्रम को बंद करा दिया। पार्षद ने इस मामले में थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस ने विशिष्ट धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
पार्षद दीपांशु घोषाल ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन के भीतर छिपे 'भेदियों' पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि "2022 में पार्षद बनने के बाद से ही मैंने इस तालाब को बचाने के लिए शिकायतें की थीं। यह आश्चर्यजनक है कि जिस जलाशय को हमने पीढ़ियों से देखा है, उसे BLRO कार्यालय के कागजों में रातों-रात 'डांगा' (सूखी भूमि) दिखा दिया गया। कुछ भ्रष्ट और लालची लोगों के कारण पूरी व्यवस्था बदनाम हो रही है। हम आड़ियदह में यह तानाशाही नहीं चलने देंगे।"
क्षेत्र के नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि न केवल दोषियों को सजा दी जाए, बल्कि उस जलाशय को खोदकर फिर से उसके पुराने स्वरूप में लौटाया जाए। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि किस आधार पर जलाशय का चरित्र बदला गया और इसमें किन-किन अधिकारियों की मिलीभगत थी।