गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से आयोजित विशेष चैरिटी चाय नीलामी में हिस्सा लिया। गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (GTAC) में आयोजित इस विशेष नीलामी में चाय उत्पादकों और खरीदारों ने सामाजिक उद्देश्य के समर्थन के लिए एक साथ भागीदारी की। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए चाय उद्योग से जुड़े सभी प्रतिभागियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल चाय उद्योग को केवल व्यावसायिक लेन-देन तक सीमित रखने के बजाय समाज और जरूरतमंदों के लिए योगदान करने का अवसर देती है।
असम की चाय केवल राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं : हिमंत
गुवाहाटी में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि असम की चाय केवल राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं है, बल्कि इसकी पहचान और सामाजिक जीवन से भी गहराई से जुड़ी हुई है। विशेष चैरिटी नीलामी के जरिये उद्योग से जुड़े उत्पादकों और खरीदारों को एक सामाजिक उद्देश्य के लिए योगदान देने का अवसर मिला। उन्होंने नीलामी में भाग लेने वाले चाय उत्पादकों, खरीदारों और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका की सराहना की। मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
GTAC की चाय कारोबार में अहम भूमिका
गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र लंबे समय से असम के चाय कारोबार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह केंद्र चाय उत्पादकों, ब्रोकरों और खरीदारों को एक मंच पर लाने के साथ बाजार में चाय की कीमत तय करने में भी अहम भूमिका निभाता है। असम का चाय उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधारों में शामिल है। खास किस्म की चाय की बढ़ती मांग और बेहतर कीमतों ने भी हाल के महीनों में इस क्षेत्र को चर्चा में रखा है।
106 मिलियन किलो से अधिक चाय की बिक्री
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के अंत तक GTAC में 106 मिलियन किलोग्राम से अधिक चाय की बिक्री हुई। इस दौरान चाय की औसत कीमत करीब 241 रुपये प्रति किलोग्राम रही। खास किस्म की चाय की रिकॉर्ड कीमतों और बिक्री ने असम के चाय उद्योग की बाजार क्षमता को भी सामने रखा है। विशेष चैरिटी नीलामी ऐसे समय आयोजित की गई, जब राज्य सरकार चाय उद्योग को मजबूत करने के साथ निर्यात बढ़ाने, विशेष किस्म की चाय को प्रोत्साहित करने और चाय उत्पादक क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
चाय से अर्थव्यवस्था और जनकल्याण तक
विशेष नीलामी ने यह संदेश भी दिया कि असम की चाय का महत्व केवल उत्पादन और कारोबार तक सीमित नहीं है। चाय से जुड़े उद्योग और कारोबारी सामाजिक कल्याण की पहलों में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। सरकार की ओर से चाय के निर्यात को बढ़ावा देने, विशेष चाय को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने तथा चाय उत्पादक क्षेत्रों तक बेहतर परिवहन और संपर्क सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए आयोजित यह नीलामी असम के चाय इकोसिस्टम की आर्थिक भूमिका के साथ उसकी सामाजिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करती है।