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12 हजार रुपये किलो बिकी असम की पुएर चाय

गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में हासिल की उल्लेखनीय कीमत चाय उत्पादकों में दिखा उत्साह

Krishna Das Parth

गुवाहाटी : असम की पारंपरिक और विशेष चाय किस्मों को देश-दुनिया के बाजार में नई पहचान मिलने लगी है। इसी कड़ी में गोलाघाट की गौरीपुर टी इंडस्ट्री की विशेष ‘पुएर टी केक’ ने गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में उल्लेखनीय कीमत हासिल की। शुक्रवार को हुई नीलामी में इस चाय के पांच किलोग्राम की बिक्री 12,000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से हुई। चाय की बिक्री ब्रोकर जे. थॉमस के माध्यम से की गई। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पुएर चाय असम की पारंपरिक मुख्यधारा की चाय से अलग एक विशेष शैली की चाय है। इसकी ऊंची कीमत से राज्य के चाय उत्पादकों के बीच प्रीमियम और विशिष्ट चाय के उत्पादन को लेकर उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।

असम की चाय के लिए गौरव का क्षण

नॉर्थ ईस्टर्न टी एसोसिएशन (एनईटीए) के सलाहकार बिद्यानंद बरकाकोटी ने पुएर टी केक को मिली कीमत को असम के चाय उद्योग के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि गौरीपुर टी इंडस्ट्री के मालिक अपराज सैकिया एनईटीए के सदस्य हैं और इस उपलब्धि के लिए उन्होंने सैकिया तथा उनकी पूरी टीम को बधाई दी। बरकाकोटी के अनुसार, असम में चाय उद्योग अब केवल पारंपरिक ब्लैक टी के उत्पादन तक सीमित नहीं है। विशेष प्रसंस्करण, स्थानीय परंपराओं और विशिष्ट स्वाद वाली चाय को बाजार में उतारने से उत्पादकों को नए बाजार और बेहतर मूल्य हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

क्या है पुएर चाय की खासियत?

पुएर चाय मूल रूप से चीन के युन्नान प्रांत की पारंपरिक चाय है। इसे आमतौर पर चाय की बड़ी पत्तियों वाली कैमेलिया साइनेंसिस की असामिका किस्म से तैयार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रसंस्करण है, जिसमें किण्वन और लंबे समय तक परिपक्व करने की प्रक्रिया शामिल होती है। पुएर चाय को सामान्य चाय की तरह केवल सूखी पत्तियों के रूप में नहीं रखा जाता। इसे पारंपरिक रूप से केक या ईंट के आकार में दबाकर तैयार किया जाता है। समय के साथ इसके स्वाद, सुगंध और रंग में बदलाव आता है। इसी कारण अच्छी तरह तैयार और परिपक्व पुएर चाय को विशेष चाय के बाजार में प्रीमियम उत्पाद के तौर पर देखा जाता है। असम में पुएर शैली की चाय का उत्पादन राज्य के विशाल चाय संसाधन और स्थानीय स्तर पर नए प्रयोगों की संभावनाओं को भी दर्शाता है।

अब फालाप चाय की बारी

पुएर टी केक की नीलामी में मिली सफलता का एक और महत्व है। एनईटीए सलाहकार बरकाकोटी ने कहा कि गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में पुएर चाय की सार्वजनिक बिक्री से भविष्य में ‘फालाप’ चाय को भी इसी मंच पर बेचने का रास्ता खुल सकता है। फालाप तिनसुकिया और मरघेरिटा क्षेत्र के सिंगफो समुदाय की पारंपरिक चाय है। इसे भी बड़ी पत्तियों वाली असामिका किस्म से तैयार किया जाता है। यह चाय केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की पारंपरिक ज्ञान-प्रणाली और खान-पान की संस्कृति से भी जुड़ी हुई है। यदि फालाप को भी सार्वजनिक नीलामी मंच पर बाजार मिलता है, तो इससे पूर्वोत्तर की पारंपरिक चाय किस्मों को व्यापक खरीदारों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।

विशेष चाय के लिए खुल रहा नया बाजार

गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में 12 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत हासिल करने वाली पुएर टी केक की बिक्री यह संकेत देती है कि विशेष और प्रीमियम चाय के लिए बाजार में अलग संभावनाएं मौजूद हैं। असम पहले से ही भारत के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में शामिल है, लेकिन पारंपरिक चाय के अलावा स्थानीय विशेषताओं वाली चाय को ब्रांड के रूप में विकसित करना उत्पादकों के लिए अतिरिक्त मूल्य पैदा कर सकता है। पुएर के बाद फालाप जैसी पारंपरिक चाय को नीलामी मंच से जोड़ने की संभावना से असम और पूर्वोत्तर की स्थानीय चाय परंपराओं को व्यावसायिक पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे छोटे और विशेष चाय उत्पादकों को भी अपने उत्पाद के लिए व्यापक बाजार तलाशने का अवसर मिल सकता है।

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