1950 के दशक में चलाया था बॉलीवुड में अपनी आवाज का जादू चित्र इंटरनेट से साभार
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1950 के दशक में चलाया था बॉलीवुड में अपनी आवाज का जादू

40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी

आशा भोंसले ने 40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने लेजेंडरी डायरेक्टर बिमल रॉय, राज कपूर के साथ-साथ लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर, सरदार मलिक, सज्जाद हुसैन, एस मोहिंदर, ए आर रहमान संग काम किया था। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर 40 और 50 के दशक की सबसे बड़ी गायिकाओं में से एक थीं।

मंगेशकर परिवार से आईं आशा भी अपनी बहन की ही तरह बेहद सुरीली आवाज वाली थीं। आशा ने अपनी आवाज का जादू बॉलीवुड में 1950 के दशक में चलाया। हालांकि उन्होंने बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज देने से पहले कई लो बजट फिल्मों में गाना गाकर पहचान पाई। 1952 में आई फिल्म 'संगदिल' में उन्होंने गाने गाए थे। म्यूजिक कम्पोजर सज्जाद हुसैन की इस एल्बम ने आशा को फेम दिलाया।

'नया दौर' और सफलता का असली स्वाद

उस जमाने के जाने माने डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1953 में आई फिल्म 'परिणीता' में आशा भोसले को साइन किया था। इसके बाद राज कपूर ने उनकी अपनी 1954 की फिल्म 'बूट पोलिश' में काम दिया। लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर ओ पी नय्यर के साथ आशा ने 1952 से लेकर 1956 तक कई गानों पर काम किया था। मगर 1957 में आई बी आर चोपड़ा की फिल्म 'नया दौर' के साथ आशा भोसले ने सफलता का असली स्वाद चखा। इस फिल्म के गाने भी नय्यर ने ही कम्पोज किए थे।

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