कोलकाता : राज्य के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए अब सरकारी विभागों में भी अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के रास्ते खुलने जा रहे हैं। पूर्वी क्षेत्र के ‘बोर्ड ऑफ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (बीओपीटी) के निदेशक डॉ. एस.एम. इजाज अहमद ने बुधवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी।
अहमद ने पिछली ममता सरकार पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय सरकारी कॉलेजों और विभागों से सहयोग हासिल करने में काफी दिक्कत होती थी। जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने में भी कई तरह की अड़चनें आती थीं। अब केंद्र की योजनाओं को प्राथमिकता देने के राज्य के नये ''डबल इंजन'' सरकार के फैसले से माहौल बदला है और हर स्तर पर सहयोग मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि सिंचाई, पीडब्ल्यूडी और पीएचई जैसे सरकारी विभागों में भी प्रशिक्षण के अवसर तैयार होने की संभावना है। इससे युवाओं को व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और रोजगार के लिए अपनी दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्ष 1961 में शुरू की गई अप्रेंटिसशिप योजना का उद्देश्य शुरुआती दौर में आठवीं कक्षा तक पढ़ाई छोड़ने वाले युवाओं को प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाना था।
बाद में इसे दसवीं और अब स्नातक स्तर तक विस्तारित किया गया है। नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम के तहत छह माह से एक वर्ष की ‘ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग’ में न्यूनतम 12,300 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलता है। नीति आयोग के अनुसार, प्रशिक्षण के बाद 74% प्रशिक्षुओं को संबंधित संस्थान में स्थायी रोजगार, 5% को स्वरोजगार और 20% को अन्य सरकारी क्षेत्रों में अवसर मिलता है।
करीब 9,000 उद्योग इस व्यवस्था से जुड़े हैं और पिछले पांच वर्षों में लगभग 16 लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य में जागरूकता बढ़ाने के लिए 5 सितंबर को विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में विशेष आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।