गैस बचत को लेकर सरकार सख्त, उपभोक्ताओं पर बढ़ा मानसिक दबाव
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में देशवासियों से कुकिंग गैस और ईंधन की खपत कम करने की अपील की है। ऐसे में एक बार फिर घरेलू LPG उपभोक्ताओं के बीच पुराने गैस नियमों की चर्चा तेज हो गयी है। प्रधानमंत्री ने रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि देश को इस समय ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्रीय जिम्मेदारी की तरह लेना होगा। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने, अनावश्यक ईंधन खर्च कम करने और गैस की बचत करने की सलाह दी। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर गैस एजेंसियों तक उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या सरकार कोई नया नियम लागू करने जा रही है।
छोड़ना पड़ सकता है LPG कनेक्शन
नये नियमों के तहत जिन घरों में पहले से पाइपलाइन गैस यानी PNG कनेक्शन मौजूद है, उन्हें घरेलू LPG कनेक्शन सरेंडर करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इससे गैस की बर्बादी और डुप्लीकेट कनेक्शन पर रोक लगेगी। कई उपभोक्ताओं को तेल कंपनियों की ओर से मैसेज भी भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा पहले से ही गैस सिलेंडर की डिलीवरी OTP आधारित कर दी गई है यानी सिलेंडर लेने के समय उपभोक्ता के मोबाइल पर आए OTP के बिना डिलीवरी पूरी नहीं होगी। वहीं उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए आधार e-KYC भी अनिवार्य किया गया है।
तेल कंपनियां कर रहीं निगरानी
गैस एजेंसियों और तेल कंपनियों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि घरेलू सिलेंडर बुकिंग को लेकर जो “25 दिन वाला नियम” है, वह कोई नया नियम नहीं है। यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिसके तहत एक घरेलू LPG सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिनों का अंतर जरूरी माना जाता है। इसका उद्देश्य घरेलू गैस के व्यावसायिक इस्तेमाल और कालाबाजारी पर रोक लगाना है। गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार कई उपभोक्ता प्रधानमंत्री की अपील के बाद इसे नया सरकारी आदेश समझ रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि तेल कंपनियां पहले से ही घरेलू खपत के आधार पर सिलेंडर बुकिंग की निगरानी करती रही हैं।
बढ़ा मानसिक दबाव
प्रधानमंत्री की अपील ऐसे समय आयी है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर दबाव बना हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार ऊर्जा बचत को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रही है। इधर कई उपभोक्ताओं का कहना है कि आम परिवार पहले से ही सीमित गैस इस्तेमाल करते हैं, इसलिए नयी अपील को मानसिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है।