साइप्रस स्थित ब्रिटिस एयरफोर्स बेस पर ड्रोन हमला हुआ। 
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ईरान युद्ध की आग में झुलसा एक और देश

ड्रोन हमले ने साइप्रस को याद दिलाया कि संकट हमेशा करीब ही है। अधिकारियों ने बताया कि अक्रोटिरी स्थित रॉयल एयर फोर्स के अड्डे पर लगे रडार उपकरणों को चकमा देते हुए सोमवार आधी रात को एक शाहेद ड्रोन से हमला किया गया।

Narendra Kumar Singh

निकोसियाः यह कहावत साइप्रस पर सटीक बैठती है कि किसी देश का भाग्य उसकी भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है। साइप्रस जैसा छोटा सा देश यूनानी, पारसी, रोमन और ब्रिटिश सभी के लिए खास रहा है। इसका कारण यह है कि यह दुनिया के सबसे पुराने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में से एक के निकट स्थित है।

देश की आजादी के करीब 66 वर्षों बाद साइप्रस खुद को पश्चिम एशिया के एक और युद्ध में फंसा हुआ पाता है, मुख्य रूप से इसलिए कि यह दो बड़े और महत्वपूर्ण ब्रिटिश सैन्य ठिकानों की मेजबानी करता है, जो इसके ब्रिटिश औपनिवेशिक अतीत से जुड़े हैं।

ड्रोन हमले ने साइप्रस को याद दिलाया कि संकट हमेशा करीब ही है। अधिकारियों ने बताया कि अक्रोटिरी स्थित रॉयल एयर फोर्स के अड्डे पर लगे रडार उपकरणों को चकमा देते हुए सोमवार आधी रात को एक शाहेद ड्रोन से हमला किया गया, जिसने सैन्य अड्डे के रनवे के पास स्थित एक विमान हैंगर को मामूली नुकसान पहुंचाया। ड्रोन को मार गिराने के लिए टाइफून लड़ाकू विमानों और दुनिया के छह सर्वश्रेष्ठ युद्धक विमानों एफ-35 को तैनात किया गया।

इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन इसने ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध के यूरोपीय क्षेत्र में फैलने का संकेत दिया। यह 1974 में तुर्किये के आक्रमण के बाद साइप्रस की धरती पर किसी तीसरे देश द्वारा किए गए किसी भी हमले को भी चिह्नित करता है। सैन्य ठिकाने पर सोमवार दोपहर के बाद हुए हमले के दूसरे प्रयास में दो ड्रोन को रोका गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पहला हमला कोई दुर्घटना नहीं था।

साइप्रस और ब्रिटिश अधिकारियों ने स्पष्ट नहीं किया है कि शाहेद ड्रोन कहां से उड़ान भरी थी, लेकिन अटकलें हैं कि यह लेबनान में ईरान के सहयोगी संगठन हिज़्बुल्ला का काम था। ब्रिटेन सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिटिश सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के उस फैसले का नतीजा नहीं था, जिसमें उन्होंने अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने अभियान के लिए सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। सरकार ने तर्क दिया कि ड्रोन को रविवार शाम को उनकी घोषणा से पहले ही भेज दिया गया था।

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