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अनिल अंबानी का शीर्ष अदालत में हलफनामा, ‘‘बिना इजाजत देश नहीं छोड़ूंगा’’

अंबानी का वादा, बिना कोर्ट की मंजूरी के नहीं करेंगे विदेश यात्रा

नयी दिल्ली : रिलायंस (एडीएजी) के चेयरमैन अनिल अंबानी ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा देकर कहा है कि वह बिना पूर्व-अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे और एजेंसियों के साथ जांच में पूरा सहयोग करेंगे। यह मामला अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) द्वारा कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये की बैंकिंग एवं कॉरपोरेट धोखाधड़ी से जुड़ा है।

शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में अंबानी ने कहा कि उनका देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है और न ही उनकी कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोई मंशा है। अंबानी ने कहा, ‘‘ मैं शपथ लेकर कहता हूं कि मैंने जुलाई, 2025 से मौजूदा जांच शुरू होने के बाद से भारत नहीं छोड़ा है और फिलहाल देश से बाहर जाने का मेरा कोई इरादा नहीं है।’’ उन्होंने साथ ही वादा किया कि यदि उन्हें किसी काम से विदेश जाना पड़ा तो वह उससे पहले अदालत की अनुमति लेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं पूरी ईमानदारी से जांच में एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा हूं और आगे भी ऐसा करना जारी रखूंगा।’’ अंबानी ने यह हलफनामा पूर्व नौकरशाह ई ए एस सरमा की उस अर्जी के जवाब में दिया है, जिसमें एडीएजी, अनिल अंबानी और समूह की कंपनियों से जुड़े कथित बड़े बैंकिंग और कॉरेपोरेट घोटाले की निष्पक्ष, तुरंत और बिना किसी भेदभाव के जांच की अपील की गई है। हलफनामे में कहा गया कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने 26 फरवरी, 2026 को पेश होने के लिए बुलाया है। उन्होंने उस तारीख को पेश होने और जांच में शामिल होने का वादा किया है। अंबानी ने कहा, ‘‘मैं अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करने का वादा करता हूं, साथ ही प्रक्रिया में स्पष्टता सुनिश्चित करूंगा और याचिकाकर्ता द्वारा तथ्यों को चुनिंदा तरीके से पेश करने को रोकूंगा।’’

उन्होंने कहा कि हलफनामा यह दिखाने के लिए दायर किया जा रहा है कि उनका व्यवहार पारदर्शी और सहयोगात्मक रहा है। जांच में ‘बिना किसी वजह के देरी’ पर नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत ने चार फरवरी को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कथित धोखाधड़ी की निष्पक्ष, तुरंत और बिना किसी के भेदभाव के जांच करने का निर्देश दिया था। जब सरमा ने आशंका जताई कि अनिल अंबानी देश छोड़कर भाग सकते हैं, तो उद्योगपति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने उच्चतम न्यायालय को भरोसा दिलाया कि वह बिना शीर्ष अदालत की मंजूरी के देश नहीं छोड़ेंगे।

सरमा की ओर से दायर जनहित याचिका में अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस समूह की कई इकाइयों पर कोष को इधर-उधर करने, वित्तीय खातों में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।

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