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अंडमान कई समुद्र के भीतर गिनीज विश्व-कीर्तिमान बनाने की तैयारी में

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रशासन मार्च 2026 के मध्य में स्वराज द्वीप के राधानगर समुद्रतट पर अनेक समुद्र के भीतर गिनीज विश्व-कीर्तिमान (अंडरवॉटर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ) स्थापित करने का प्रयास आयोजित कर रहा है। इन कीर्तिमानों में “समुद्र के भीतर सबसे बड़ा ध्वज-विस्तारण”, “समुद्र के भीतर सबसे ऊंचा मानव-स्तंभ” और “समुद्र के भीतर सबसे लम्बी मानव-श्रृंखला” शामिल हैं। “समुद्र के भीतर सबसे लम्बी मानव-श्रृंखला” के लिए मनोरंजनात्मक तथा प्रमाणित समुद्र-गोताखोरों को भाग लेने हेतु आमंत्रित किया गया है। यह आयोजन 20 से 30 मार्च 2026 तक राधानगर समुद्रतट संख्या 7, स्वराज द्वीप, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में प्रस्तावित है। इस चयन प्रक्रिया के लिए केवल भारतीय नागरिक पात्र होंगे। न्यूनतम प्रमाणपत्र के रूप में किसी भी मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान से ‘मूल-स्तर समुद्र-गोताखोर’ प्रमाणन आवश्यक है तथा न्यूनतम 10 या उससे अधिक दर्ज गोताखोरियां होना अनिवार्य है। प्रतिभागियों को चिकित्सक द्वारा हस्ताक्षरित ‘डुबकी लगाने हेतु उपयुक्त’ स्वीकृति सहित चिकित्सा-प्रपत्र जमा करना होगा। प्रतिभागियों की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी आवश्यक है। उच्च-स्तरीय समुद्र-गोताखोर प्रमाणन तथा 10 से अधिक दर्ज गोताखोरियां रखने वाले प्रतिभागियों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिन प्रतिभागियों के पास अपना गोताखोरी उपकरण है, उन्हें भी प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।

जिनके पास उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए प्रशासन द्वारा आवश्यक सामग्रियाँ उपलब्ध कराई जाएंगी। चयन प्रक्रिया एक समूह द्वारा की जाएगी, जिसमें अनुभवी गोताखोर विशेषज्ञ तथा संबद्ध अधिकारी शामिल होंगे। चयनित प्रतिभागियों को आगे की प्रक्रिया की जानकारी संदेश के माध्यम से प्रदान की जाएगी। 50 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों के लिए ‘चिकित्सकीय रूप से सक्षम’ प्रमाणपत्र अनिवार्य है। पंजीकरण प्रपत्र जमा करने की अंतिम तिथि 15 दिसम्बर 2025 सायं 5 बजे तक निर्धारित की गई है, जिसे प्रतिभागी निर्दिष्ट ईमेल पते पर भेज सकते हैं। यात्रा, निवास एवं भोजन आदि से जुड़े सभी खर्च प्रतिभागियों को स्वयं वहन करने होंगे। यदि विश्व-कीर्तिमान सफलतापूर्वक स्थापित हो जाता है, तो प्रमाणपत्रों से जुड़े शुल्क प्रतिभागियों द्वारा वहन किए जाएंगे, जिनमें सहभागिता प्रमाणपत्र, डिजिटल प्रमाणपत्र तथा स्मृति-चिह्न शामिल हैं, जिन्हें लेना पूर्णतः स्वैच्छिक है।

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