बैरकपुर पालिका के चेयरमैन उत्तम दास शिकायत पत्र दिखाते हुए  REP
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बैरकपुर पालिका के चेयरमैन को 'डिजिटल अरेस्ट' करने की कोशिश

कुख्यात अपराधियों से नाम जोड़कर धमकाया

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बैरकपुर : आधुनिक तकनीक के दौर में साइबर अपराधी अब केवल आम जनता को ही नहीं, बल्कि जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला बैरकपुर नगरपालिका का है, जहाँ चेयरमैन उत्तम दास को एक बेहद शातिर तरीके से 'डिजिटल अरेस्ट' करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय अपराधों में फंसाने की डरावनी साजिश रची गई। इस घटना के बाद बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट और साइबर क्राइम सेल में हड़कंप मच गया है।

कॉल का सनसनीखेज घटनाक्रम

चेयरमैन उत्तम दास ने बताया कि गुरुवार की सुबह उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने स्वयं को कोलकाता पुलिस के मुख्यालय লালবাাজার (लालबाजार) के साइबर क्राइम विभाग का अधिकारी बताया। कॉल के दौरान ठगों ने बेहद पेशेवर लहजे में दावा किया कि उत्तम दास के व्यक्तिगत पहचान पत्र (आईडी कार्ड) का उपयोग करके कई फर्जी मोबाइल सिम कार्ड खरीदे गए हैं।

मामले की गंभीरता दिखाने के लिए, जालसाजों ने तुरंत कॉल को 'होल्ड' पर रखा और कथित तौर पर उसे मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के साथ कॉन्फ्रेंस पर जोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि यह एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जांच का हिस्सा है।

आतंकवादी अफजल खान और करीम मूसा का लिया नाम

धोखाधड़ी करने वालों ने चेयरमैन पर मानसिक दबाव बनाने के लिए कुख्यात नामों का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर जारी सिम कार्डों का इस्तेमाल अफजल खान और करीम मूसा जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधियों और आतंकवादियों द्वारा किया जा रहा है। ठगों ने उन्हें डराया कि उनके खिलाफ वारंट जारी होने वाला है और उन्हें तब तक 'डिजिटल निगरानी' (डिजिटल अरेस्ट) में रहना होगा जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती। उन्हें किसी से भी बात न करने और कॉल न काटने की सख्त हिदायत दी गई।

सूझबूझ से टली बड़ी वारदात

जब ठगों ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना शुरू किया, तो चेयरमैन उत्तम दास ने संयम से काम लिया। उन्होंने कॉल पर मौजूद व्यक्तियों से कहा कि वे इस मामले में कानूनी तरीके से अपने वकील से संपर्क करेंगे। जैसे ही उन्होंने वकील का नाम लिया, दूसरी तरफ से फोन करने वाले लोग बौखला गए और उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। अपराधियों के लहजे में आए इस बदलाव ने चेयरमैन के संदेह को पुख्ता कर दिया कि यह कोई आधिकारिक कॉल नहीं, बल्कि साइबर ठगी का जाल है।

पुलिस कमिश्नर से शिकायत और जांच शुरू

चेयरमैन ने तुरंत इस पूरे मामले की जानकारी टीटागढ़ थाने को दी और एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने बैरकपुर के पुलिस कमिश्नर को भी इस घटना की गंभीरता से अवगत कराया है। वर्तमान में बैरकपुर साइबर क्राइम थाने की पुलिस इस मामले की तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस उन फोन कॉल्स के रिकॉर्ड्स, आईपी (IP) एड्रेस और कॉल ओरिजिन की जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह 'डिजिटल अरेस्ट' का एक क्लासिक मामला है, जिसमें बड़े नामों का डर दिखाकर लोगों से मोटी रकम वसूली जाती है। पुलिस ने आम जनता और जन प्रतिनिधियों को ऐसे कॉल से सतर्क रहने की सलाह दी है।

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